संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के आदिवासियों ने सम्मेलन कर सरकार को चेताया : बहुत हुआ विनम्र निवेदन अब सिर्फ दनादन

रायपुर 19 फ़रवरी 2018 - जल, जंगल, जमीन की लड़ाई, संवैधानिक अधिकारों के हनन, अनुसूचित क्षेत्रो में बढ़ते संवैधानिक प्रावधानों की अवहेलना सरकारी आतंक , पांचवी अनुसूची,पेसा कानून और 21 सूत्रीय मांगों को लेकर भारी जनसँख्या के बीच राजधानी में हुए आदिवासी सम्मेलन को सरकार पोषित मीडिया ने राजनीतिक स्वार्थ  का सम्मेलन करार दे दिया? मुख्यधारा की टीवी मीडिया…
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अपनी जड़ों से उखड़ते आदिवासी : छत्तीसगढ़ से सुधा भारद्वाज की एक ज़मीनी रिपोर्ट; भाग…

छत्तीसगढ़ में घट रही घटनाओं को सरसरी तौर पर देखने पर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहाँ सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है.…

बस्तर : कलगांव के 17 किसानों की जमीन बीएसपी टाऊनशिप के लिये छीन ली गई, ग्राम सभा…

अनुभव शोरी विकास के नाम पर आदिवासियों के अधिकारों का हनन आखिर कब तक,क्या विकास की परिभाषा यह है कि अपने…

सुपेबेड़ा गाँव के आदिवासी गंदा पानी पीने को मजबूर 58 की मौत : छत्तीसगढ़ सरकार, मुख्य सचिव, सचिव पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय को राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने दिया नोटिस

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा गाँव से एक किमी की दूरी पर हीरा खदान है। सरकार ने 2005 से पूरे इलाके को संरक्षण में ले रेखा। पिछले साल 58 आदिवासियों की मौत गंदा पानी पीने को हो चुकी है, आज सुपेबेड़ा में करीब 235 लोग किडनी, लीवर की बीमारी से ग्रसित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनका गांव हीरा खदान क्षेत्र में होने की वजह से सरकार उन्हें यहां से…
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अडानी की माइन्स या हाथी, कौन जिम्मेदार है किसानों की तबाही के लिए?

हाथी के हमलों से ग्रामीणों को बचाने में नाकाम वन विभाग व राज्य सरकार के असंवेदनशील रवैये के खिलाफ विशाल सभा व रैली…

बस्तर बुमकाल विद्रोह : आज भी जिंदा है गुण्डाधुर का संघर्ष आदिवासी परंपरा में

छत्तीसगढ़, बस्तर 10 फ़रवरी 2018। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम 1910 की महान बस्तर बुमकाल विद्रोह के अमर नायक क्रांतिकारी…

भूमि अधिकार संसद : जल-जंगल-जमीन ये हो जनता के अधीन

तिल्दा-रायपुर। छत्तीसगढ़ बनने के डेढ़ दशक बाद भी प्रदेश के स्थानीय आदिवासी, किसान और भूमिहीन अपने अधिकारों से वंचित हैं। डेढ़ दशक बाद भी प्रदेश में आदिवासी नीति नहीं बन पाया है। राज्य के जल संसाधनों का लाभ किसानों के बजाय उद्योगपतियों को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ में वंचित वर्ग के अधिकार और स्थानीय संसाधनों पर स्थानीय समुदाय के अधिकार को लेकर भी आज तक कोई…
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11 दिन बाद राजकुमार जेल से रिहा : वेदांता सोना खान से बारनवापारा अभ्यारण खतरे में, विरोध में संघर्ष का संकल्प

छत्तीसगढ़, बलौदाबाजार, 4 फ़रवरी 2018। 11 दिन से जेल में बन्द बारनवापारा अभयारण्य क्षेत्र के ग्राम रामपुर निवासी आदिवासी राजकुमार कौंध को आधी रात जमानत मिल गई। जमानत पर रिहा हुए राजकुमार कौंध सीधे अनिश्चितकालीन धरना स्थल पहुँचे जहाँ बार अभ्यारण क्षेत्र की जनता ने राजकुमार का भव्य स्वागत किया और आंदोलन को तेज करने के लिए व आरोपी को सजा दिलाने के लिए…
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