संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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हिमाचल प्रदेश

वनाधिकार के लिए संघर्ष तेज करने का ऐलान : हिमालय नीति अभियान

हिमालय नीति अभियान द्वारा 19-20 सितम्बर 2015 को बिलासपुर में भूमि अधिकार व वन अधिकार कानून पर दो दिवसीय राज्य संमेलन आयोजित किया गया, जिस में प्रदेश भर के नौ जिला से 130 सामाजिक कार्यकर्ताओं व वन निवासियों ने भाग लिया। संमेलन में उतराखंड, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, उड़ीसा से भी प्रतिभागी शामिल हुए। संमेलन को इंसाफ दिल्ली के महा सचिव वीरेंद्र…
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रिकोङ्ग्पिओ में कब्जा हटाओ अभियान के विरुद्ध विशाल विरोध प्रदर्शन

हिमालय नीति अभियान हिमलोक जागृति मंच वन अधिकार संघर्ष समिति किनौर प्रेस विज्ञप्ति रिकोङ्ग्पिओ में कब्जा हटाओ…

पर्यावरण के नाम पर वनाधिकार कानून की अनदेखी !

हिमाचल के किसानों द्वारा किए गए नाजायज कब्जे के मसले पर हिमाचल उच्च न्यायालय का 6 अप्रैल 2015 का आदेश पर्यावरण की आड़ में लिया गया एक ऐसा फ़ैसला है, जिस में वनाधिकार कानून-2006 व उस पर माननीय उच्चतम न्यायालय के प्रावधानों व आदेशों की अवहेलना हुई है, साथ में जीने के संवैधानिक अधिकार की भी अनदेखी की गई है। सरकारों व न्यायालयों की कारपोरेट पोशाक…
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होली-बजोली पॉवर प्रोजेक्ट का विरोध कर रहीं 32 महिला आंदोलनकारी गिरफ्तार

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में होली-बजोली पॉवर प्रोजेक्ट के विरोध में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठी 32 महिलाओं को…

जेपी कंपनी के कड़छम-वांगतू प्रोजेक्ट का बांध तोड़ने का आदेश, 5.19 लाख का जुर्माना

किन्नौर एसडीएम कोर्ट का फैसला :जेपी कंपनी के कड़छम-वांगतू प्रोजेक्ट का बांध तोड़ने का आदेश, 5.19 लाख का जुर्माना हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के भावानगर एसडीएम कोर्ट ने 19 मार्च को जेपी कंपनी की ओर से बनाए गए 1000 मेगावॉट के कड़छम-वांगतू प्रोजेक्ट के बांध के आधे निर्माण को तोड़ने के आदेश दिए हैं। बांध पर करीब 100 करोड़ रुपए…
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वन अधिकार कानून लागू करने के आधे-अधुरे फैसले

हिमाचल सरकार ने प्रदेश में 7 अप्रैल को आयोजित होने वाली ग्राम सभा में वन अधिकार कानून -2006 के तहत वन अधिकार…

मंत्री जी, देश की वनभूमि पर कारपोरेट का जंगलराज कायम हो गया है !

देश आज उस मुहाने पर खड़ा है जहां या तो जंगल बचाने वाले आदिवासी बचेंगे, या जंगलराज लाने वाले कारपोरेट. देश का क़ानून…

दिल्ली की प्यास बनी हिमाचल की त्रास

दिल्ली के निवासियों को ज़िंदा रखने की कीमत हिमाचल के लोग अपनी आजीविका के विनाश और रेणुका बाँध परियोजना के दुष्प्रभावों के रूप में चुकाने पर मजबूर हैं. क्या दिल्ली की प्यास हज़ारों लोगों को बेघर और बेबस कर ही बुझेगी? रेणुका बांध परियोजना गिरी नदी पर 148 मीटर ऊँचा 26 किमी लंबी झील लगभग 2100 हैक्टेयर जमीन लगभग 1142 परिवार तथा 70 पंचायतों से भी अधिक लोग…
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