राजस्थान के रावतभाटा परमाणु बिजलीघर में 40 वर्षों से जारी है ठेका मजदूरों का शोषण
23 जून को रावतभाटा रिएक्टर में परमाणु विकिरण के रिसाव की सूचना मिलने पर संघर्ष संवाद की टीम 10 जुलाई को रावतभाटा पहुँची. रेडियेशन के खतरों और परमाणु-ऊर्जा के सवालों की पडताल करते हुए हमें एक नयी सच्चाई जानने को मिली – इस प्लांट में ठेके पर काम कर रहे मजदूरों की अमानवीय दशा. प्लांट के नियमित स्टाफ विकिरण वाली जगहों पर इन ठेका-मजदूरों को ही भेजते हैं और 23 जून की घटना में ट्रीशियम विकिरण के रिसाव का शिकार हुए 38 मजदूर भी ऐसे ही ठेका-श्रमिक थे.
7. यहां के प्रबंधन ने 2009 में श्रमिकों के योग्यता, कार्य व अनुभव के आधार पर कई श्रमिकों के वेतन में ईजाफा किया जैसे न्युनतम मजदुरी रू 298 है तो प्रबंधन ने उसमें एक फैक्टर लगा दिया जैसे रू.298×1.25=रू.372.50, रू.298×1.50=रू.447, रू.298×2.0=रू.596 आदि कर के टेक्निकल श्रेणी में डाल दिया, TG-0, TG-1, TG-2 आदि, वैसे ही कुछ अकुशल श्रमिकों को अर्द्धकुशल, कुछ अर्द्धकुशल श्रमिको को कुशल एवं कुछ कुशल श्रमिको को अतिकुशल कर दिया गया। जिससे श्रमिको की आर्थिक स्थिती में सुधार हुआ। लेकिन 2012 में एक और तो मंहगाई में हर खाद्य पदार्थो का दाम बढ़ता जा रहा हैं वहीं आर आर साइट प्रबंधन उनकी आर्थिक स्थिती को सुधारने के बजाए उनका वेतन आधा कर उनकी आर्थिक स्थिती बिगाडने पर तुला है जैसे रू.596 से घटा कर रू.298, रू.447 से घटा कर रू.253, रू.372 से घटा कर रू.210, रू.298 से घटा कर रू.253, रू.253 से घटा कर रू.210, रू.210 से घटा कर रू. 180 कर रहा है। जब संघ ने पूछा तो प्रबंधन का कहना है ये तो NPCIL(Nuclear Power Corporation of India Limited) हेड क्वाटर, मुम्बई का आदेश है। वेतन बढा कर कम कर देना श्रमिको के लिए न्यायोचित नहीं है। लगता है NPCIL केवल अपने ही नियम पर चलता है श्रम कानून से नहीं। महोदय श्रम कानून के कौन से अधिनियम में लिखा है कि किसी श्रमिक का वेतन बढा देने के बाद उसका वेतन आधा कर दिया जाएगा।