खनन हादसा मामले में जाँच दल की रिपोर्ट वन, श्रम, राजस्व विभाग व जे.पी. कम्पनी पर आपराधिक मामले की माँग
- खदान के अंदर जहां पर पहाड़ दरका था वहां पर प्रशासन द्वारा शवों को निकालने के लिए समुचित कार्यवाही नहीं की जा रही।
- जिस तरह से पहाड़ दरका है उसे हटाने के लिए बड़ी मशीनों की आवश्यकता है जिसको अभी तक जिला प्रशासन द्वारा नहीं मंगवाया गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन द्वारा जान-बूझकर इन राहत कार्यो में देरी की जा रही है।
- कार्य की प्रगति को देखते हुए लग रहा है कि जिला प्रशासन इस मामले को दबाने का प्रयास कर रही है ताकि शव अंदर ही दबे रहें व सच्चाई बाहर न आ सके।
- उक्त खदान, जहां पर हादसा हुआ है उसकी लीज समाप्त हो चुकी है तथा यह निष्प्रयोज्य हो चुकी हैं लेकिन फिर भी इसमें बड़े पैमाने पर कार्य होता रहा है। इस अवैध खनन में खनन विभाग, वन विभाग, राजस्व विभाग, श्रम विभाग, पुलिस विभाग, कुछ स्थानीय पत्रकार, जिला प्रशासन, विधायक, व सत्तारूढ़ सरकार भी दोषी है। लेकिन अभी तक कार्यवाही केवल स्थानीय लोगों पर ही हुई है व पुलिस एवं वनविभाग के कुछ निचले स्तर के अधिकारियों को निलंबित किया गया है। जबकि कार्यवाही यहां के खनन अधिकारी, डीएफओ, श्रम आयुक्त, राजस्व अधिकारियों, प्रदूषण अधिकारियों, ठेकेदारों के ऊपर होनी चाहिए व इनको भी एफआईआर में नामजद किया जाना चाहिए।
- इन खदानों को चलाने में एक बड़ी भूमिका जेपी कम्पनी की है जिसके द्वारा यहां पर सभी विभागों को खरीदकर प्राकृतिक संपदा की अबाध लूट की जा रही है। इस कम्पनी के तमाम करार रद्द किए जाने चाहिए, कम्पनी के मालिकों पर हत्या, प्राकृतिक संसाधनों की लूट के लिए डकैती के मामले दर्ज किए जाए।
- जिन 16 लोगों के नाम प्राथमिकी दर्ज की गई है उनको अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है ओर वे खुलेआम घूम रहे हैं व पुलिस द्वारा कहा जा रहा है कि सब लोग फरार हैं इसलिए कोई गिरफ्तारी नहीं हो पा रही है।
- इन खदानों में आए दिन मौतें होती रहती हैं जिसे स्थानीय पुलिस थानों एवं ठेकेदारों की सांठ गांठ से सौदेबाजी कर गरीब मजदूरों को कुछ मुआवजा देकर मामले को दबाया जाता रहा है लेकिन अभी तक प्राकृतिक संसाधनों की बेतहाशा लूट पर कोई भी उच्च स्तरीय जांच नहीं की गई है।
- सोनभद्र में हो रही पत्थर खदानों, कोयला खदानों के तहत रेलवे विभाग ने भी कई कड़े पत्र शासन को लिखे है जिसमें विभाग ने इन खदानों से रेलवे लाईनों पर किसी भी बड़ी दुर्घटना को होने के भी संकेत दिए हैं।
- राजस्व विभाग, वन विभाग व खनन विभाग को मालूम ही नहीं कि किस विभाग की भूमि पर यह खनन हो रहा था इन विभागों द्वारा एक दूसरे पर दोषारोपण किया जा रहा है जबकि पुराने रिकार्डो को खंगाला जाए तो पता चल जाएगा कि यह सारी भूमि रिकार्डांे में वन विभाग के नाम दर्ज है।
- इस संबध में मंच मांग करता है कि सोनभद्र के अवैध खनन पर सीबीआई जांच होनी चाहिए व इस अवैध खनन के संबध में जुड़े पिछले व मौजूदा सभी विभागों व अधिकारियों पर अपराधिक मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए।