कुडनकुलम: सर्वोच्च न्यायालय में जनता की अवमानना
अपने हक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे देश के लोगों का इस तरह के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय से गुहार लगाना निर्थक है। और यह कहा जा सकता है कि अदालत खुद भी इसी सिस्टम का हिस्स है जो आकांशओं और वंचित जन समुदाय और ‘ व्यापक जनहित’ की मुख्य अवधारणा के बीच बढ़ती खाई को पाटने में पूरी तरह नाकाम रही है। इस प्रकार के मामलों में न्यायालय के समक्ष याचना…
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