संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad

कुडनकुलम: सर्वोच्च न्यायालय में जनता की अवमानना

अपने हक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे देश के लोगों का इस तरह के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय से गुहार लगाना निर्थक है। और यह कहा जा सकता है कि अदालत खुद भी इसी सिस्टम का हिस्स है जो आकांशओं और वंचित जन समुदाय और ‘ व्यापक जनहित’ की मुख्य अवधारणा के बीच बढ़ती खाई को पाटने में पूरी तरह नाकाम रही है। इस प्रकार के मामलों में न्यायालय के समक्ष याचना…
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वाह री सरकार ! कारपोरेट हित में विदेशी निवेश को बढ़ावा, जनहित में विदेशी अनुदान पर…

'इंसाफ' इस देश में जल जंगल ज़मीन को लेकर चल रहे आन्दोलनों को मजबूत करने वाला एक साहसिक संगठन रहा है जिस पर…

खनन माफिया: न्याय के लिए 53 दिन से अनिश्चितकालीन धरना

राजस्थान के झुंझनू जिले में अवैध खनन का विरोध कर रहे स्वतंत्रता सैनानी ताड़केश्वर शर्मा के पौत्र प्रदीप शर्मा की संदिग्ध मौत को पुलिस ने आत्महत्या करार दिये जाने के विरोध में 19 मार्च 2013 से अनिश्चित कालीन धरना आज 53वें दिन भी जारी है लेकिन प्रशासन ने आज तक खान माफियाओं के विरोध में कोई कार्यवाही नहीं की है. इस हत्या के दोषियों की गिरफ़्तारी,…
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लोअर सुकतेल: बर्बर दमन, बहादुराना प्रतिरोध और व्यापक समर्थन

दिल्ली के उड़ीसा भवन पर आज सामाजिक संगठनों, कार्यकर्त्ताओं और छात्र-नौजवानों ने बलांगीर जिले के मगुरबेडा गांव में…

कुडनकुलम पर कोर्ट का फैसला: जनता की अवमानना

सर्वोच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लान्ट से जुड़ी याचिका को खारिज करते हुये इसे हरी झण्डी…

मारुति सुजुकी मजदूरों का आंदोलन

जब-जब दमन बढ़ता गया तब-तब संघर्ष बढ़ता गया एक बार फिर मारुति सुजुकी के संघर्षरत मजदूरों पर पूंजी की रक्षा में लगी हरियाणा पुलिस व प्रशासन ने दमन तेज कर दिया है। दमन की ताजा तरीन घटना को 19 मई को तब अंजाम दिया गया जब मारुति सुजुकी के संघर्षरत मजदूरों, उनके परिवार व गांव वाले, क्रांतिकारी, प्रगतिशील, लोकतांत्रिक संगठनों व ट्रेड…
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प्रतिरोध की आवाज़ ‘इन्साफ’ पर सरकार का निरंकुश हमला: चितरंजन सिंह

जल, जंगल ज़मीन की लड़ाइयों और लोकतंत्र तथा धर्मनिरपेक्षता के संघर्ष को वर्षों से मजबूत करने वाले संगठन 'इन्साफ'…

नया भू-अधिग्रहण कानून: आमूलचूल बदलाव या यथास्थिति

गुजरी एक मई को नयी दिल्ली में एक विशेष बैठक में, भू अर्जन व पुनर्वास के मुद्दे पर लाए जा रहे नए कानून के परिप्रेक्ष में यह यह प्रस्ताव सर्व सम्मति से पारित किया गया की :- जब की 1884 का साम्राज्यवादी, शासकीय सम्प्रभुतावादी, भू अर्जन कानून में बुनियादी बदलाव लाना ही नहीं, उसे ख़ारिज करने की भी हम बेहद ज़रूरत मानते हैं, प्रस्तावित…
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