संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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बांध विरोधी आंदोलन

गढ़वा में प्रस्तावित कनहर बांध पर छत्तीसगढ़ सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट करें- माकपा

रायपुर। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने झारखंड के गढ़वा जिले में कनहर नदी पर प्रस्तावित बांध के संबंध में छत्तीसगढ़ सरकार से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। प्रस्तावित कनहर बांध से सरगुजा जिले के 10 ग्राम पंचायतों के पूरी तरह डूबने की आशंका व्यक्त की जा रही है। माकपा ने आरोप लगाया है कि सिंचाई के नाम पर इस प्रस्तावित बांध का वास्तविक…
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कनहर बांध के मामले में एन.जी.टी. (हरित कोर्ट) का विरोधाभासी निर्णय !

कनहर बांध के मामले में एन.जी.टी. (हरित कोर्ट) द्वारा सरकार का पर्दाफाश लेकिन निर्णय विरोधाभासी नये निर्माण पर…

जल सत्याग्रह का 32वां दिन : फिर दिखाईं अतिक्रमित जमीने

आज 12 मई को 32 वें दिन जल सत्याग्रह जारी है, लोगों के पैर गलने लगे , हालत ख़राब होने लगी, पैर लहुलुहान होने लगे , बुखार की शिकायत और अन्य तकलीफे होने लगी लेकिन सरकार की बेरुखी से और असंवेदनशीलता से लोगों में रोष फैलता जा रहा है । दूर दूर से आ कर लोगों ने जल सत्याग्रह को अपना समर्थन व्यक्त किया । वही देश के 100…
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नर्मदा घाटी के सरदार सरोवर के प्रभावित क्षेत्रो में पुनार्वास के दावे खोखले : जाँच…

बडवानी, मई 11, 2015, नर्मदा घाटी में सरदार सरोवर बाँध से विस्थापितों का पूर्ण पुनर्वास (जैसा सरकार ने…

जल सत्याग्रह का 27वां दिन : भोपाल में ओंकारेश्वर बाँध विस्थापितों का प्रदर्शन

आज 7 मई को 27 वें दिन जल सत्याग्रह जारी है, 26वें दिन भोपाल में सैकड़ो ओंकारेश्वर बाँध विस्थापितों द्वारा विशाल…

कनहर बांध से उपजे सवाल

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से सटे उत्तरप्रदेश के सोनभद्र जिले में कन्हर बांध के निर्माण से छत्तीसगढ़ के इस जिले के रामचंद्रपुर ब्लाक से 19 गांव पूर्णतः तथा 8 गांव आंशिक रुप से डुबान में आ रहे हैं। इन 27 गांवों की सम्मिलित आबादी लगभग 50 हजार है और इसमें लगभग दो तिहाई आदिवासी-दलित हैं। इस बांध निर्माण का विरोध न केवल उत्तरप्रदेश में हो रहा है,…
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जल सत्याग्रह का 24वां दिन : सत्याग्रहियों के पैरों की हालत गंभीर

आज 4 मई को 24 वें दिन जल सत्याग्रह जारी है, स्वास्थ्य बहुत ज्यादा ख़राब हो रहा है पर अपने हक के लिए लड़ने का…

जल सत्याग्रह का 22वां दिन : पानी में मनाया मजदूर दिवस

आज 2 मई को 22 वें दिन जल सत्याग्रह जारी है, पैरों में सुजन, तेज शरीर दर्द, जी मतलाना, पैरों में खुजली , बुखार और तेज धुप के बावजूद जल सत्याग्रहियों का अपनी हक की लड़ाई लड़ने का जज्बा कम नहीं हुआ । सब का एक सुर में कहना है अगर सरकार उनकी बात नहीं सुनती तो यही उनकी जल समाधि हो जाएगी । नर्मदा बचाओ आन्दोलन की विज्ञप्ति; 1 मई …
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