संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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झारखण्ड

वन पर हो जन का अधिकार : संघर्ष वाहिनी

-दीपक रंजीत 7 मई 2017; झारखण्ड में छात्र-युवा संघर्ष वाहिनी एवं जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी के आह्वान पर संयुक्त वन रक्षा कमिटी के आयोजन में ग्राम सभा से वनाधिकार विषय पर खुचीडीह, चौका, चांडिल, सरायकेला- खरसावां के स्कूल प्रांगण में एक दिवसीय संगोष्टी सम्पन्न हुआ। संगोष्टी को संबोधित करते हुए झारखंड वनाधिकार मंच के कुमार दिलीप , राधा…
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झारखण्ड : अडानी के खिलाफ अनिश्चितकालीन सत्याग्रह से विधायक प्रदीप यादव गिरफ्तार;…

मणि भाई झारखण्ड के गोड्डा जिले में प्रस्तावित अडानी पावर प्लांट के खिलाफ 16 अप्रेल से चल रहे आमरण अनशन के…

झारखण्ड : अडानी के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरने में उमड़ा जनशैलाब

झारखण्ड के गोड्डा जिले में प्रस्तावित अडानी पावर प्लांट के खिलाफ 16 अप्रेल से चल रहे आमरण अनशन के पांचवे दिन प्रभावित क्षेत्र के लोगों ने 10 किमी. लम्बी पदयात्रा निकाली है। मोतिया से निकलकर बक्सरा तक निकाली गई महारैली में लोगों को 'अडानी कम्पनी वापस जाओ' का नारा बुलंद करते देखा गया। वहीं पारम्परिक हथियार से लैश आदिवासी 'जान देंगे जमीन नहीं…
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झारखण्ड : सीएनटी-एसपीटी में संशोधन के खिलाफ सिमडेगा में विशाल जनसभा

-मनोज प्रवीण लाकड़ा सीएनटी- एसपीटी एक्ट में संशोधन को रद्द करने व राज्य के सभी 28 आदिवासी विधायकों से…

झारखण्ड : भाजपा सरकार ने अडाणी को दी 1700 एकड़ जमीन, विरोध में स्थानीय आदिवासियों ने जमीन नहीं देने का संकल्प दोहराया

झारखण्ड के गोड्डा जिले के मोतिया गांव में अडानी को पावर प्लांट के लिए दी जा रही 1700 एकड़ बहुफसलीय जमीन के खिलाफ मोतिया रैयत संघ के बैनर तले 16 फ़रवरी 2017 को ऐतिहासिक रैली निकाली गई है । इस पावर प्लांट के लिए मोतिय गांव के आस-पास की 14 मौज़ा के किसानों की 1700 एकड़ बहुफ़सली खेती की जमीन को चिन्हित किया गया है। इस परियोजना से मोतिया, सोनडीहा, पटवा,…
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60 साल से विस्थापित आदिवासियों से धोखा : शोषण की नींव पर खड़ा है बोकारो इस्पात…

झारखण्ड के बोकारो इस्पात संयंत्र के विस्थापितों के जुझारू संघर्ष ने एक बार फिर से सरकार की दोरंगी नीति को…

प्राकृतिक संसाधन के असीमित लूट की हवस का परिणाम है ललमटिया खदान हादसा

झारखंड के गोड्डा जिलान्तर्गत कोल इंडिया के सहायक कंपनी इसीएल की राजमहल परियोजना के ललमटिया में भोड़ाय कोल माइंस…

तिलका मांझी शहादत दिवस : आदिविद्रोही तिलका मांझी को संघर्षों का क्रांतिकारी सलाम

भारत के औपनिवेशिक युद्धों के इतिहास में जबकि पहला आदिविद्रोही होने का श्रेय पहाड़िया आदिम आदिवासी समुदाय के लड़ाकों को जाता हैं जिन्होंने राजमहल, झारखंड की पहाड़ियों पर ब्रितानी हुकूमत से लोहा लिया। इन पहाड़िया लड़ाकों में सबसे लोकप्रिय आदिविद्रोही जबरा या जौराह पहाड़िया उर्फ तिलका मांझी हैं। 13 जनवरी 1785 को अंग्रेजों ने तब भागलपुर के चौराहे…
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