संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
.

हिमाचल प्रदेश

हुल-1 लघु जल विद्युत परियोजना के विरोध में चम्बा में प्रदर्शन

हुल-1 लघु जल विद्युत परियोजना के विरोध में चम्बा में 4 अक्तुबर 2012 को जिलाधीश कार्यालय के बाहर प्रदर्शन व एक दिन की भूख हड़ताल साल घाटी निवासी 2003 से हुल-1 लघु जल विद्युत परियोजना के विरोध में संघर्ष करते रहे हैं। आप सब जानते हैं कि दिनांक 14.02.2010 को हमारी एक बैठक में कम्पनी के ठेकेदारों, गुण्ड़ों व शरारती तत्व द्वारा घातक…
और पढ़े...

जेपी कंपनी को पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की मिली सबसे बड़ी सजा

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 4 मई 2012 को एक महत्वपूर्ण फैसले में जेपी कंपनी के बघेरी (नालागढ़) स्थित थर्मल पॉवर…

रेणुका बांध में समायेंगे लाखों पेड़

पर्यावरण के प्रति हमारे नेता कितने जागरूक हैं या पर्यावरण के कितने हिमायती हैं ये देखने में आता है रेणुका डेम के संदर्भ में। दिल्ली को 23 क्यूसेक्स पानी देने के लिए और हि. प्र. को 40 मेगावाट बिजली पैदा करने के दावे को पेश करते हुए और गिरी नदी को राष्ट्रीय संपदा में शामिल करते हुए इस परियोजना को कार्यरूप दिया जा रहा है लेकिन इस परियोजना से…
और पढ़े...

जडेरा माईक्रो हाईडल प्रोजेक्ट के खिलाफ आन्दोलन

ग्राम पंचायत जडेरा हिमाचल प्रदेश के जिला चम्बा रावी नदी की सहायक नदी साल नदी के साथ होल नाला पर प्रस्तावित…

हरिपुर नाला लघु जल विद्युत् परियोजना में हुई अनियमितताओं की जॉच होगी

हरिपुर नाला लघु जल विद्युत् परियोजना 1.5 मेगावॉट पर हिमाचल हाई कोर्ट की राजीव शर्मा की खण्ड पीठ ने सात…

जे.पी. थर्मल प्लांट बघेरी पर 100 करोड़ का जुर्माना

हिमाचल हाईकोर्ट ने जेपी एसोसिएट्स के बघेरी थर्मल संयंत्र पर एक अभूतपूर्व निर्णय दे कर यह आभास कराया है कि प्रदेश में संसाधनों की कॉरपोरेट लूट मची है और इस काम में यहां के राजनेता-अधिकारी बेशर्मी से शामिल हैं। हाईकोर्ट ने दूसरी बार इस परियोजना को वर्तमान मंत्रिमंडल से मिली मंजूरी पर भी सवाल उठाया। यह भी पिछले कुछ वर्षों में पहली बार हुआ है कि किसी…
और पढ़े...

भाखड़ा बांध विस्थापित आर-पार की जंग को तैयार

भाखड़ा बांध विस्थापितों की सभी कमेटीओं की बैठाकें 9 जून को मलराओं तथा 10 जून कोसरियां व वाला गाँव में संपन हुई. इन…

हिमाचल प्रदेश के जनसंघर्ष: न्याय के लिए बढ़ते कदम

हिमाचल प्रदेश का भू-भाग अपनी पहचान एवं इतिहास के लिए एक राज्य के रूप में प्रशासनिक गठन की तारीख का मोहताज नहीं है. प्रकृति के वरदानों से लबरेज यह क्षेत्र मनुष्य एवं प्रकृति के रिश्तों की एक मिसाल तब तक बना रहा जब तक प्राकृतिक संपदा का दोहन मुनाफे के लिए करने वालों का पदार्पण यहाँ नहीं हुआ था. हिमाचल प्रदेश के जनसंघर्ष: न्याय के लिए बढ़ते कदम…
और पढ़े...