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हिमाचल प्रदेश
12 गांवों की पंचायतों के किसानों ने जल, जंगल, जमीन तथा आजीविका बचाने के लिए कसी कमर
हिमाचल प्रदेश में एक तरफ जहां बड़े बांध, माइक्रो हाइड्रो पॉवर प्लांट के खिलाफ स्थानीय लोग संघर्षरत हैं तथा भाखड़ा बांध से प्रभावित विस्थापित आज तक पुनर्वास की लड़ाई लड़ रहे हैं वहीं इस बीच हिमाचल प्रदेश में धौलाधार सेंचुरी का मुद्दा गरमा रहा है।
1999 में बैजनाथ की 12 पंचायतों के क्षेत्र को धौलाधार सेंचुरी क्षेत्र में शामिल किया गया था। 2006…
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तीखे विरोध के चलते प्रशासन को स्थगित करनी पड़ी जनसुनवाई
सतलुज जल विद्युत निगम के महत्वाकांक्षी लुहरी प्रोजेक्ट को स्थानीय लोगों के घनघोर विरोध का सामना करना पड़ रहा है।…
हिमाचल हाईकोर्ट की ग्रीन बैंच ने सुंदरनगर सीमेंट प्लांट रद्द किया
दिनांक 13 दिसंबर 2010 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के स्पेशल हरित बैंच ने सुंदरनगर सीमेंट प्लांट जिला मंडी की पर्यावरण…
रेणुका बांध के खिलाफ संघर्ष जारी है. . . .
दिनांक 15 दिसंबर 2010 को हिमाचल प्रदेश के रेणुका, सिरमौर में जबरदस्ती भू-अधिग्रहण के खिलाफ स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद हिमाचल प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) तथा राजस्व विभाग ने भूमि अधिग्रहण कानून 1894 के सेक्शन 9 के तहत रेणुका बांध परियोजना के लिए पनार गांव की 680 बीघा जमीन (लगभग 57 हैक्टेयर) को अधिसूचित कर दिया। रेणुका बांध संघर्ष समिति…
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पर्यावरण, नदी, पहाड़ बचाने का संकल्प : विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को रैली एवं जनसभा…
जब पहाड़ टूटता है-तब सिर्फ मिट्टी, पत्थर-कंकड़, बालू, पेड़-पौधे ही नहीं गिरते हैं वरन नष्ट होता है वहां का समाज, उस…