संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
.

राज्यवार रिपोर्टें

हम मरब, कउ नहीं बचाई बाबू: जीतलाल वैगा

यह केवल जीतलाल वैगा की कहानी नहीं हैं, बल्कि सिंगरौली से करीब 30 किलोमीटर दूर रिलायंस के पावर प्लांट के बनने के बाद अमजौरी में विस्थापन के बाद बनी बस्ती में सबकी यहीं कहानी है. ये उन लाखों-करोड़ो आदिवासी में शामिल हैं, जिन्हें भारत सरकार विकास के मुख्यधारा में लाने के बहाने विस्थापित कर रही है। विस्थापन सिर्फ जमीन-जंगल से ही नहीं…
और पढ़े...

मारुति में मजदूरों पर दमन: अंधेर नगरी और चमगादड़ों का तिमिर-राग

अंधेरे का तिलिस्म जिन चमगादड़ों ने खड़ा किया है, वे इस मामले में मारुति प्रबंधन की शक्ल में हैं, सरकारी पक्ष के…

कोकाकोला संयंत्र: राष्ट्रीय हित में कारपोरेटी लूट को न्यौता

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से 32 कि.मी. दूर छारबा गांव में कोकाकोला संयंत्र लगाने की अनुमति देकर राज्य सरकार…

चुटका के बहाने शहरों से एक संवाद

नदियों के जलग्रहण क्षेत्र में परमाणु विद्युत संयंत्र लगाने के विनाशकारी प्रभाव सामने आ सकते हैं। नर्मदा नदी पर मध्यप्रदेश के करीब एक तिहाई यानि 2.5 करोड़ लोग आश्रित हैं। यदि इसमें किसी भी प्रकार का परमाणु प्रदूषण हुआ तो अकल्पनीय विध्वंस होगा। हमें इस विषय पर पूरी ईमानदारी से विचार करना चाहिए। चुटका परमाणु संयंत्र के मुद्दे पर सचिन कुमार जैन का…
और पढ़े...

यह कैसी तरक्की है शोषण की ये चक्की है : दिल्ली मेट्रो रेल कामगार यूनियन

मेट्रो ठेका कर्मचारियों ने डी.एम.आर.सी. प्रशासन का पुतला फूंका! गुजरी 30 मई को दिल्ली मेट्रो रेल…

संवेदनहीनता से उपजी संवादहीनता सरकार के लिए घातक – डॉ सुनीलम

माधुरी बहिन गत 17 मई से ही खरगौन जेल में हैं। उन्होंने जेल जाते समय कहा कि वे गुलाम भारत में स्वतंत्र नागरिक हैं, ऐसा कोई कार्य जिन्होंने नहीं किया, इसको लेकर वे जमानत दें। माधुरी जी का आचरण राष्ट्रीय आंदोलन की याद दिलाता है जब स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आजादी के लिये सत्याग्रह करते थे तथा गिरफ्तार किये जाने पर जमानत लेने से इन्कार कर देते…
और पढ़े...

ओम्कारेश्वर बांध : घोघलगाँव में प्रभावितों की सभा और आन्दोलन की घोषणा

ओम्कारेश्वर परियोजना प्रभावित गांव घोघलगाँव में 30 मई को हजारों प्रभावितों ने रैली निकालकर आमसभा की. सभा में…

चुटका परमाणु ऊर्जा संयंत्र के खिलाफ प्रतिरोध की जीत

चुटका परमाणु संयंत्र के खिलाफ चुटका व आसपास के गांवों की आदिवासी जनता द्वारा चलाए जा रहे जुझारू संघर्ष और तमाम…

नियमगिरी, सरकार और जनाक्रोश

उड़ीसा सरकार शुरू से ही वेदांता कंपनी के पक्ष में ग्राम सभा से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में पैरवी करती आ रही है जबकि स्थानीय ग्रामवासी, आदिवासी अपनी जमीन, जंगल, नदी, झरने पहाड़ बचाने की लड़ाई लगातार लड़ते आ रहे हैं. अब 18 अप्रैल 2013 को सुप्रीम कोर्ट की ओर से फैसला आया कि वेदांता कम्पनी को उड़ीसा के नियामगिरी की पहाड़ियों में बॉंक्साइड के खनन के…
और पढ़े...