संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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राज्यवार रिपोर्टें

दिल्ली – मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर

दिल्ली मुबंई औद्योगिक गलियारा प्रोजेक्ट भारत की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक है। यह प्रोजेक्ट भारत और जापान सरकार के संयुक्त प्रयास से बन रहा है। इस कॉरिडोर को बनाने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य निवेश और व्यापार को बढ़ाना है। इसके पहले फेस पर तकरीबन 100 अरब डॉलर का खर्च आने का अनुमान लगाया जा रहा है। जिसके लिए लिए सरकार…
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देश का सबसे बड़ा विस्थापन: दिल्ली-मुम्बई कॉरीडॉर

आज देश भर के किसान और खेती के साथ जुड़े मजदूर, छोटे व्यापारी, कारीगरों के उजड़ने की साजिश चल रही है, वह भी वही…

मारूति सुजुकी के मज़दूरों के समर्थन में लखनऊ में उठी आवाज़

भारी ठंड और बारिश को धता बताते हुए विभिन्न जन संगठनों के प्रतिनिधि मारूति सुजुकी के संघर्षरत मज़दूरों के समर्थन में गुज़री 5 फरवरी को लखनऊ के जीपीओ पार्क स्थिति गांधी प्रतिमा पर जुटे और उन्होंने मज़दूरों के पक्ष में इंसाफ़ की आवाज़ उठायी। याद रहे कि मानेसर (गुड़गांव, हरियाणा) स्थित मारूति सुजुकी इण्डिया लिमिटेड के मजदूर पिछले साल की 18 जुलाई से…
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पुलिसिया हमले के खिलाफ 5 राजनीतिक दल पी.पी.एस.एस. के समर्थन में आये सामने तथा किया…

एक तरफ लाठी, डंडों और मशीनगन से लैस पुलिस के जवान तो दूसरी तरफ निरीह छोटे-छोटे बच्चे जो अपने पुरखों की जमीन…

बर्बर पुलिसिया दमन के विरोध में उड़ीसा भवन पर प्रदर्शन

दिल्ली के उड़ीसा भवन पर आज सामाजिक संगठनों, कार्यकर्त्ताओं और छात्र-नौजवानों ने जगतसिंहपुर में पोस्को कम्पनी का विरोध कर रहे ग्रामीणों पर चल रहे बर्बर पुलिसिया दमन और किसानों की जबरन भूमि कब्जाने की सरकारी नीति के विरोध में प्रदर्शन किया. इस विरोध प्रदर्शन में संदीप ने कहा कि उड़ीसा पुलिस द्वारा 3 फ़रवरी, 2013 को सुबह के लगभग 4 बजे 12 प्लाटूनों…
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सरकार-कोरपोरेट का गठजोड़: पोस्को विरोधी आंदोलनकारियों पर कातिलाना हमला, 10 किसान…

3 फ़रवरी, 2013 को सुबह के लगभग 4 बजे 12 प्लाटूनों से नुआगांव में पोस्को संयंत्र का विरोध कर रहे स्थानीय लोगों पर…

एक बूँद पानी भी अभिजीत ग्रुप के प्लांट को नहीं देंगे : किसानों का ऐलान

बिहार के बाँका जिले में चन्दन नदी पर लक्ष्मीपुर (बौंसी प्रखण्ड) में केवल सिंचाई कार्य के लिए करीब 40 वर्ष पूर्व…

नवउपनिवेशवाद का नया दौर : अफ्रीका में जमीन की लूट में भारत भी शामिल

मई 2009 में प्रकाशित इस समाचार के बाद से अब तक काफी जमीन हड़पी जा चुकी है विदेशों में भारतीय कंपनियों द्वारा पूंजी निवेश करने या उन देशों की कुछ कंपनियों का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया को आम तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास माना जाता है और इसकी बढ़-चढ़ कर…
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