.
राज्यवार रिपोर्टें
जेल से डॉ. सुनीलम की चिट्ठी
प्रिय साथियो, आपको फैसले के संबंध मे पता चल गया होगा, मुझे इन्स्पेक्टर सरनाम सिंह को जलाकर मारने, टीआई एस.एन.कटारे की राइफल छिनकर जानलेवा हमला करने तथा राइफल लेकर भाग जाने तथा फायर बिग्रेड के ड्रायवर धीरसिंह की 5 बार सर पर पत्थर मारकर हत्या करने के प्रकरणो मे सजा सुनाई गई है। आप जानते ही है कि ना ये घटनाये हुयी और न ही हम इन घटनायो मे शामिल थे।…
और पढ़े...
सरकारी इशारों पर नाचती निचली अदालतें
मुलताई गोलीकांड में 14 साल बाद पिछली 18 अक्टूबर को फ़ैसला आया और जैसा कि अंदेशा था, डा. सुनीलम समेत तीन लोगों को…
पूर्व विधायक सुनीलम सहित 3 को उम्रकैद
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई में किसानों पर हुई गोलीबारी के प्रकरण पर 14 वर्ष बाद फैसला आया है। मुलताई…
मुलताई गोलीकाण्ड के महत्वपूर्ण प्रकरणों में फैसला: डॉ .सुनीलम्
सर्व विदित है कि मध्यप्रदेष के बैतूल जिले की मुलताई तहसील के सामने 12 जनवरी 1998 को मुलताई मे लगातार फसले खराब होने के कारण मुआवजा मॉंग रहे किसानों पर कांग्रेस की सरकार के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के षड़यंत्र के चलते मेरी हत्या तथा किसान आन्दोलन को कुचलने के उद्देष्य से पुलिस गोलीचालन प्रायोजित किया गया था, जिसमे 24 किसान शहीद हुए, 150 किसानो…
और पढ़े...
किसानो के हित मे संघर्ष जारी रहेगा- डॉ. सुनीलम्
किसान संघर्ष समिति
शहीद किसान स्मृति कुटीर
स्टेशन रोड,मुलतापी, बैतूल ( म.प्र.), 460661
किसान संघर्ष…
दयामनी बारला : फौलादी इरादों वाली भारतीय महिला
दयामनी बारला को आज जमानत मिल गई है इस मोके पर हमें जश्न मनाने से ज्यादा इस बात पर गौर करना चाहिए कि सामाजिक…
जन संसद 2012 में मुलताई का घोषणापत्र
मुलताई में 14 वें शहीद किसान स्मृति सम्मेलन एवं 188 वी किसान महापंचायत के अवसर पर 12 जनवरी 2012 को आयोजित जनसंसद के 5 वे अधिवेशन में देश भर से आये हुये जनान्दोलनों और जन-संगठनों के संघर्षशील समाज कर्मी और बुद्धिजीवी देश पर छाये संकट और सरकारों द्वारा उठाए जनविरोधी कदमों पर घोर चिन्ता प्रकट करते है और नीचे लिखी घोषणाऐं करते है -
घोषणा एक: - देश…
और पढ़े...
दयामनी जेल में
सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला इन दिनों 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में रांची जेल में हैं। छह साल पुराने मामले…
किसान संघर्ष समिति: एक परिचय
किसान संघर्ष समिति की स्थापना 25 दिसंबर 1997 को मुलतई तहसील में किसानों द्वारा की गयी। फसलें नष्ट…
आतंकवाद के नाम पर मुसलमानों का उत्पीड़न
‘आतंकवाद के नाम पर कैद निर्दोषों के रिहाई मंच’ ने हैदराबाद के अब्दुल रज्जाक मसूद की आत्महत्या का जिम्मेदार खुफिया एजेंसियों को ठहराते हुए हैदराबाद के खुफिया अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा चलाने की मांग की है। आरोप है कि खुफिया एजेंसियां उन पर मुखबीर बनने का दबाव डाल रही थीं। रिहाई मंच द्वारा लखनऊ में 15 अक्टूबर 2012 को…
और पढ़े...