संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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राज्यवार रिपोर्टें

माही बांसवाड़ा परमाणु पॉवर प्लांट विरोधी आंदोलन

बांसवाड़ा से मुश्किल से 15 कि.मी. दूर आड़ीभीत में किसान अपनी ज़मीन बचाने के लिए लगातार मई 2012 से धरने पर बैठे हैं। इन किसानों की ज़मीन माही (बांसवाडा़, राजस्थान) बांध के पास बन रहे परमाणु ऊर्जा संयंत्र में जा रही है। बांसवाड़ा से मात्र 20 किमी. दूर बारी में प्रस्तावित परमाणु पॉवर प्लांट के लिए तीन ग्राम पंचायतों (नापला, बारी, कुटम्बी) की 3447…
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किसानों का अंतिम फैसला, हम जमीन नहीं देंगे

नवलगढ़ क्षेत्र के किसानों ने प्रशासन को दो टूक कह दिया है कि जमीन का अधिग्रहण किसी सूरत में नहीं होने…

डाबला में संकल्प सभा, जारी रहेगा अवैध खनन विरोधी आंदोलन

राजस्थान के सीकर जिले की तहसील नीमकाथाना के ग्राम डाबला में अवैध खनन के खिलाफ चल रहे संघर्ष को एक साल पूरे होने पर…

जारी है : भूमि अधिग्रहण के खिलाफ सत्याग्रह

पिंडरगंगा घाटी, जिला चमोली, उत्तराखंड में प्रस्तावित देवसारी जलविद्युत परियोजना विरोधी आंदोलन जारी है। राष्ट्रीय नदी गंगा की एकमात्र स्वतंत्र बहती सहायिका पिडंरगंगा पर बांधों की विभीषिका लादने का विरोध जारी है। बांध के विरोध के कारण गढवाल विश्वविद्यालय के अध्यापकों ने झूठ बोलकर सर्वे किये। हमारे पास इसके सबूत हैं। ज्ञातव्य है कि इस…
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मजदूर दिवस पर श्रम आयुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन

एक मई ‘मजदूर दिवस’ के अवसर पर राजस्थान निर्माण एवं जनरल मजदूर यूनियन, राजस्थान महिला कामगार यूनियन व राजस्थान…

जडेरा माईक्रो हाईडल प्रोजेक्ट के खिलाफ आन्दोलन

ग्राम पंचायत जडेरा हिमाचल प्रदेश के जिला चम्बा रावी नदी की सहायक नदी साल नदी के साथ होल नाला पर प्रस्तावित माइक्रो हाईडल पॉवर प्रोजेक्ट के विरोध में वहां की स्थानीय जनता पिछले 8-10 सालों से लामबन्द है। स्थानीय जनता इस पॉवर प्रोजेक्ट का इसलिए विरोध कर रही है कि इस नाले के आसपास के गांव में न तो पीने के पानी का विकल्प है और न ही सिंचाई के लिए,…
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हरिपुर नाला लघु जल विद्युत् परियोजना में हुई अनियमितताओं की जॉच होगी

हरिपुर नाला लघु जल विद्युत् परियोजना 1.5 मेगावॉट पर हिमाचल हाई कोर्ट की राजीव शर्मा की खण्ड पीठ ने सात…

जे.पी. थर्मल प्लांट बघेरी पर 100 करोड़ का जुर्माना

हिमाचल हाईकोर्ट ने जेपी एसोसिएट्स के बघेरी थर्मल संयंत्र पर एक अभूतपूर्व निर्णय दे कर यह आभास कराया है कि प्रदेश…

मध्य प्रदेश के जनसंघर्ष: आजीविका का सवाल

प्रदेश में 11 प्रमुख नदियाँ बहती हैं. यह नदियाँ कभी लोगों की खुशहाली का कारण होती थीं, लेकिन आज कंपनियों, कार्पोरेट्स और सरकारों के मुनाफ़ा कमाने का साधन बन चुकी हैं, क्योंकि सरकारें इन नदियों पर बाँध बनाकर इनका पानी बेचने का काम करने लगी हैं. नर्मदा, चम्बल, ताप्ती, क्षिप्रा, तवा, बेतवा, सोन, बेन गंगा, केन, टोंस तथा काली सिंध इन सभी नदियों के…
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