संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
.

राज्यवार रिपोर्टें

दिल्ली के 100 गांव एकजूट : किसान आंदोलन के समर्थन का ऐलान

-दीवान सिंह दिल्ली के नजफ़गढ़ में 7 मार्च 2021 को किसान आंदोलन के समर्थन में आयोजित पंचायत में 100 गांवों के प्रतिनिधियों ने 3 कृषि कानून, आपसी भाईचारा और मीडिया का रोल पर चर्चा की गई। इस पंचायत में करीब 100 गांवो के प्रतिनिधि और शहरी Resident welfare association (RWAs) ने मिलकर किसान आंदोलन के प्रति अपना समर्थन घोषित किया। भावी रणनीति के लिए 21…
और पढ़े...

मध्य प्रदेश : चुटका से शुरू हुई नर्मदा चेतना यात्रा

जीवन दायनी नर्मदा मध्यप्रदेश की जीवन रेखा एवं आस्था का केन्द्र है। परन्तु कई वर्षो से इस पर संकट छाया हुआ है। शहर…

कर्नाटक : ‘MSP दिलाओ अभियान’ में दिखें किसान विरोधी कानूनों से मंडी खत्म…

‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने कर्नाटका से अपने ‘एमएसपी दिलाओ अभियान’ की शुरुआत की है। गुलबर्गा और बल्लारी की कृषि उपज…

उत्तर प्रदेश : पूर्वांचल में संयुक्त किसान मोर्चा के गठन का आगाज, बनारस सहित तीन जिलों में होगी महापंचायत

वाराणसी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के राजनीतिक धड़े भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुआई वाली केंद्र की मोदी सरकार के तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर पूर्वांचल में भी संयुक्त किसान मोर्चा के गठन और किसान आंदोलन की कवायद तेज हो गई है। वाराणसी के राजघाट स्थित सर्व सेवा संघ के…
और पढ़े...

लैंड टाइटल एक्ट : विश्व बैंक के एजेंडे को आगे बढ़ाते नीति आयोग की नयी पेशकश

जिनके सरोकार बदलती दुनिया और एक नियमित अंतराल पर केंचुल बदलते पूंजीवाद से रहे हैं वे लंबे समय से यह बात कहते आ रहे…

100 दिन : अधिकारों और न्याय के संघर्षों में परिवर्तित होता किसान आंदोलन

-जगदीप सिंग संधू  कृषि पारंपरिक तौर से भारतीय समाज की सांस्कृतिक पहचान है। कृषि ही जीवन पद्धति की धुरी है। कृषि के…

किसान आंदोलन के 100 दिन : एक रिपोर्टर की नज़र से देखें दिल्ली बॉर्डर के हाल

-गौरव गुलमोहर किसान आंदोलन तीन महीने का कठिन दौर पार कर चौथे महीने में प्रवेश कर चुका है। किसानों के सौ दिन डटे रहने को पूरी दुनिया अचंभित नज़रों से देख रही है। गाहे-बगाहे लोग अनुमान लगाते रहते हैं कि किसान अब और ज्यादा दिनों तक आंदोलन में नहीं बैठे रह सकते, लेकिन तभी किसान नया रणनीतिक दांव सामने लाकर सबको चौंका देते हैं। लोग अनुमान लगा रहे थे कि…
और पढ़े...

छत्तीसगढ़ : भिलाई स्टील प्लांट के निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन

सेल के अध्यक्ष के नाम दिये पत्र में कहा कारखाना नहीं चलाना है तब छत्तीसगढ़ियों की जमीन वापस करे भूअर्जन अधिनियम के…

पच्चीसवें साल में पेसा : ग्राम सभा को सशक्त करने के लिए आया कानून खुद कितना मजबूत!

-कुंदन पाण्डेय पेसा यानी पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) क़ानून 1996 में आया था। इस कानून को आदिवासी-बहुल क्षेत्र में स्व-शासन (ग्राम सभा) को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से लाया गया था। इस कानून के वर्तमान स्थिति का अनुमान इस एक तथ्य से लगाया जा सकता है कि पच्चीस साल होने को है पर कुल दस में से चार राज्यों ने इसके लिए जरूरी…
और पढ़े...