संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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राज्यवार रिपोर्टें

संपादकीय, मार्च 2011

चेरनोबिल परमाणु संयंत्र की दुर्घटना के 25 साल पूरे होते-होते जापान की मौजूदा प्राकृतिक विभीषिका हमारे सामने है। जापान में आये भूकम्प तथा परमाणु संयंत्रों से होने वाले रेडिएशन से भी दुनिया के शासक सबक सीखने को तैयार नहीं हैं। चर्चाओं, लेखों और बयानों में यह कहा जा रहा है कि इस तरह की दुर्घटनायें संभावित हैं, जरूरत इन स्थितियों से निपटने की…
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रेल विस्तार परियोजनायें : भूमि अधिग्रहण का तीखा विरोध

सिंगूर और नंदीग्राम के प्रस्तावित भूमि अधिग्रहणों पर ग्रहण लगाने के बाद हाबड़ा के सांकराइल, बोलपुर, हुबली के…

गंगा एक्सप्रेस वे विरोधी आंदोलन

गाँवों-गाँवों में किसान शांति सेना का गठन हुआ प्रारंभ   कृषि-भूमि बचाओ मोर्चा उ. प्र. द्वारा अगस्त-सितंबर, 2010 में सघन जनजागरण एवं बड़ी-बड़ी जन सभायें की गयीं। उ. प्र. सरकार द्वारा गंगा एक्सप्रेस वे परियोजना के लिए तत्काल भूमि अधिग्रहण की मंशा से गाजीपुर जनपद की तीनों प्रभावित तहसील सैदपुर, सदर व मुहम्मदाबाद में तहसीलदार की अध्यक्षता में भूमि…
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भूमि अधिग्रहण स्वीकार्य नहीं : सीमेंट प्लांट विरोधी आंदोलन, नवलगढ़

किसानों ने घेरा तहसील, छात्रों से पुलिस की धक्का-मुक्की यदि हुआ भूमि अधिग्रहण तो घड़साना जैसे हालात- का. अमराराम…

साक्षात्कार : कुमटी माझी, अध्यक्ष नियामगिरि सुरक्षा समिति

हमें विकास की रोशनी दिखायी जा रही है। कोठियों, बाजारों, सड़कों का जाल दिखाया जा रहा है। हमारी उन्नति की, समृद्धि…

साक्षात्कार : अभय साहू, अध्यक्ष पोस्को विरोधी संघर्ष, उड़ीसा

आज हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि गिरफ्तारियों तथा फर्जी मुकदमों का सामना कैसे करें? पांच वर्ष तक जनता ने अपनी कुर्बानियों तथा संघर्षों के बल पर पोस्को कम्पनी को एक इंच ज़मीन पर भी काबिज नहीं होने दिया फिर भी सरकारें जनता की भावनाओं, आकांक्षाओं को नजरअंदाज कर रही हैं। हकीकत यह है कि हमारी  सरकारें अमरीकी दादागीरी के समक्ष नतमस्तक हैं।…
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जैतापुर परमाणु ऊर्जा परियोजना : विरोध में एकजुट होते लोग

वृहत मुम्बई और राज्य में विद्युत समस्या हल करने के उपाय के तौर पर राज्य सरकार ने फ्रांस की मदद से जैतापुर में…

आज भी वंचित है बिरसा का गाँव

गाँव के आदिवासियों को स्कूल और पानी चाहिए। स्कूल है, पर अध्यापक नहीं आते और पानी लाने के लिए औरतों को मीलों जाना पड़ता है। बीते 17 अप्रैल, 2010 का बिरसा मुंडा के उलिहातु गाँव में जाकर जो कारुणिक दृश्य मैंने देखे, उससे मर्माहत हूं। बिरसा के गाँव और आसपास के जंगल खत्म हो रहे हैं। जो जंगल अरण्यजीवियों की आजीविका का एक मात्र साधन रहा है, वह क्यों…
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