संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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राज्यवार रिपोर्टें

बफर जोन के नाम पर आदिवासियों का जल-जंगल-जमीन छीनने का अधिकार किसी को नहीं : डॉ. सुनीलम

पाथरी, 6 जून 2016 : मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ ब्लाक के ग्राम पाथरी में मछुआरा संघर्ष समिति के तत्वाधान में एक तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। 4-6 जून 2016 तक चले इस तीन दिवसीय शिविऱ में आस-पास के दर्जनों गांवों के मछुआरा समुदाय तथा बफर जोन से प्रभावित किसानों तथा आदिवासियों ने भाग लिया। शिविर में मौजूदा विकास की…
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पेंच बांध : 30 गाँव पानी में डूबेंगे; जिला प्रशासन ने धारा 144 से कसा शिकंजा

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा पेंच व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत माचागोरा बांध में 15 जून के बाद बारिश का पानी एकत्र…

9 अगस्त 2016 : भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पुरे होने के अवसर पर देश भर के जन संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रम

प्रिय साथी, जिंदाबाद! आशा है आप 9 अगस्त 2016 को अगस्त क्रांति की याद में जनक्रांति दिवस मनाने के कार्यक्रम की तैयारी कर रहे होंगे। मैंने आपको जन क्रांति दिवस के पर्चे, बैनर का मजनून भेजा है तथा अगस्त क्रांति पर अंग्रेजी और हिंदी में लेख भेज रहा हूं। 2 अगस्त को पीसीएसडीएस की बैठक में इरोम शर्मिला के 16 वर्ष तक AFSPA (एएफपीएसए )रद्द कराने की…
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करछना के किसानों पर कहर जारी : 9 सितम्बर के दमन के बाद गांवों में मेधा पाटेकर का…

पिछले वर्ष 2015 की 9 सितम्बर को उत्तर प्रदेश सरकार ने करछना में किसानों की जमीन हड़पने के लिए क्रूर पुलिसिया…

श्री श्री यमुना विवाद : नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूलन के इतिहास में ऐसी दबंगई पहली बार

नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूलन (एनजीटी) के आदेश की अवमानना करना इस देश में कोई नई परिघटना नहीं है। अब तक न जाने कितने शासन-प्रशासन से लेकर निजी कंपनियों के उदाहरण हैं जहां एनजीटी के आदेशों की अवहेलना की गई है या फिर उनके पालन में कोताही बरती गई है। किंतु मार्च 2016 में श्री श्री रविशंकर द्वारा किए गए विश्व सांस्कृतिक उत्सव ने सारी हदें तोड़ दीं। नैशनल…
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जल-हल-पदयात्रा : समझ, संकल्प और इक्छाशक्ती का अकाल – योगेन्द्र यादव

जल-हल-पद यात्रा के समापन पर योगेन्द्र यादव ने कहा –बुंदेलखंड में पशुओ के लिए चारा , पानी का संकट सरकार…

विकास के बोझ से डूबती नर्मदा नदी

मानसून की आहट आते ही नर्मदा घाटी के निवासियों के चेहरे पर डर झलकने लगता है। बिना पुनर्वास के उन्हें विस्थापित होने को मजबूर किया जाता है। वहीं दूसरी ओर सरकारी आंकड़े बता रहे हैं कि निमाड़ के डूब प्रभावित शत प्रतिशत गांवों का पुनर्वास हो चुका है। जबकि जमीनी हकीकत इसके एकदम विपरीत है। देवेन्द्र सिंह तोमर का महत्वपूर्ण आलेख जिसे हम सप्रेस से साभार…
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