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राज्यवार रिपोर्टें
इसे सूखा नहीं, सामूहिक नरसंहार कहिए !
स्वतंत्र पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव ने सूखा, पलायन, भूखमरी और किसानों की आत्महत्या से पस्त बुंदेलखंड से लोट कर यह लम्बी रिपोर्ट लिखी है जिसे हम चार किस्तों में आपसे साझा करेगे. पेश है बुंदेलखंड की जमीनी हालत पर लिखी रिपोर्ट का अंतिम चौथा भाग;
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अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री की बलि चढ़ते आदिवासी
1992 में अल्ट्राट्रेक सीमेंट फैक्ट्री लगने के बाद से ही यहां पर लगातार खनन का कार्य चल रहा है जिससे स्थानीय…
चम्पारण सत्याग्रह : एक शताब्दी का सफर
जिन मूल्यों को लेकर महात्मा गांधी ने चम्पारण से भारत में अपने अभियान की शुरुआत की थी तथा किसानों की समस्याओं…
अफवाहों से बुंदेलखंड में नाकामी छुपाने की कोशिश
स्वतंत्र पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव ने सूखा, पलायन, भूखमरी और किसानों की आत्महत्या से पस्त बुंदेलखंड से लोट कर यह लम्बी रिपोर्ट लिखी है जिसे हम चार किस्तों में आपसे साझा करेगे. पेश है बुंदेलखंड की जमीनी हालत पर लिखी रिपोर्ट का तीसरा भाग;
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झारखण्ड सरकार द्वारा घोषित स्थानीयता निति के विरोध में प्रतिरोध तेज
सच्चिदानंद सोरेन
झारखण्ड के जामा प्रखंड के बेदिया पंचायत के गादी चुटो गांव के झाझरापहाड़ी…
छत्तीसगढ़ में पत्रकारों पर पुलिसिया दमन के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन
नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छत्तीसगढ़ में पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग और गिरफ्तार पत्रकार साथियो की रिहाई को…
मिट्टी खाकर पेट भरती “माता” : बुंदेलखंड भाग दो
स्वतंत्र पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव ने सूखा, पलायन, भूखमरी और किसानों की आत्महत्या से पस्त बुंदेलखंड से लोट कर यह लम्बी रिपोर्ट लिखी है जिसे हम चार किस्तों में आपसे साझा करेगे. पेश है बुंदेलखंड की जमीनी हालत पर लिखी रिपोर्ट का दूसरा भाग;
बारह साल से मिट्टी फांक कर खुद को एक जिंदा गठरी में तब्दील कर चुकी शकुन रायकवार की कहानी खेतों-गांवों…
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रमन सिंह के दमन के ख़िलाफ : 10 मई 2016 को जंतर-मंतर पर पत्रकारों का प्रदर्शन
पत्रकार सुरक्षा कानून संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले छत्तीसगढ़ के पत्रकारों द्वारा 10 मई 2016 को सुबह 10 बजे…
सूखा, अकाल और सरकारी उपेक्षा से मरते बुंदेलखंड के लोग : भाग एक
कॉपी में लिखी गई बातें
स्वतंत्र पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव ने सूखा, पलायन, भूखमरी और किसानों की आत्महत्या…
कोयला निगल सकता है भारत के जल स्रोतः ग्रीनपीस इंडिया
417 कोयला ब्लॉक अक्षत क्षेत्र में
नई दिल्ली। 5 अप्रैल 2016। एक तरफ भारत में लगातार सूखे की खबर सूर्खियों में है तो दूसरी तरफ ग्रीनपीस को मिली जानकारी के अनुसार भारत सरकार उन नीतियों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जिन्हें देश के प्राचीन जंगलों, वन्यजीव और जल स्रोतों को बचाने के लिये बनाया गया है। हाइड्रोलॉजिकल मापदंडों के आधार पर…
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