.
विस्थापन विरोधी आंदोलन
शेरों के नाम पर विस्थापन
मध्य प्रदेश के श्योपुरी जिले में दस साल पहले एशियाई शेरों को बसाने के लिए 28 गांव के लोगों को जिन शेरों के नाम पर विस्थापित किया गया वहां आज तक शेर नहीं लाये गये। केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्री की पहल के बावजूद गुजरात सरकार वहां अपने शेरों के बसाने से इंकार ही करती रही है।
दस साल पहले विस्थापन के समय 28 गांवों के हजारों लोगों को सभी सुविधाओं के…
और पढ़े...
निरमा सीमेंट कम्पनी तथा भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन
गुजरात के भावनगर जिले में एक सीमेंट कारखाना लगाने के फैसले के विरोध में 12 गांवों के 5000 से अधिक किसानों की…
रेल विस्तार परियोजनायें : भूमि अधिग्रहण का तीखा विरोध
सिंगूर और नंदीग्राम के प्रस्तावित भूमि अधिग्रहणों पर ग्रहण लगाने के बाद हाबड़ा के सांकराइल, बोलपुर, हुबली के…
दमन, साजिशों से जूझते कलिंगनगर के आंदोलनकारी आदिवासी
राज्य के दमन (पुलिस ज़ुल्म) एवं टाटा कंपनी के गुंडों (स्थानीय बीजू जनता दल के नेता एवं कार्यकर्ता) के हमले का कंपनी विरोधियों द्वारा सामना।
राज्य एवं कंपनी के आतंक के कारण कंपनी विरोधी आंदोलनकारी रात में ही निकलते हैं लोगों से संपर्क करने।
आतंक एवं अत्याचार का यह आलम की कंपनी विरोधी आंदोलनकारी अस्पताल या डाक्टर के पास इलाज कराने जाते…
और पढ़े...
आज भी वंचित है बिरसा का गाँव
गाँव के आदिवासियों को स्कूल और पानी चाहिए। स्कूल है, पर अध्यापक नहीं आते और पानी लाने के लिए औरतों को मीलों जाना…
निरमा सीमेंट प्लांट विरोधी संघर्ष
महुआ क्षेत्र 1998 तक सौराष्ट्र का कश्मीर हुआ करता था वहां अधिकतर सभी फसलें हुआ करती थीं। आज भी महुआ की सब्ज़ी बम्बई…
बलात कब्जायी जमीनें, अपनाया साम-दाम-दण्ड-भेद का आजमाया तरीका! सरकार एवं कम्पनियों का विकास को तेज करने का नया अंदाज़ !!
छत्तीसगढ़ राज्य में 69000 एकड़ जमीन (जो कृषि भूमि है) को गैर कृषि कार्यों हेतु स्थानांतरित कर दिया गया। सड़क के किनारे की लगभग सारी की सारी जमीनों का मालिकाना अब किसानों का नहीं रह गया है। आज किसानों की भूमि हड़पने की तिकड़म अपने शबाब पर है। आज छत्तीसगढ़ में भूमि हड़पने की साजिशें सबसे बड़ी चुनौती है।
रायगढ़ जनपद की रायगढ़, तमनार एवं घरघोड़ा…
और पढ़े...
कार्यवाहियाँ पूर्व निर्धारित फिर भी जारी है जन सुनवाइयों की नौटंकी
पर्यावरण विभाग की जांच संदेह के घेरे में। कोल वाशरी की बोलती तस्वीरें।
मामला ‘‘जिंदल कोल वाशरी’’ जन सुनवाई का…
पॉवर प्लांट से विस्थापित एक गांव की कहानी
मुआवजा मिल गया, खर्च भी हो गया अब क्या करें ?
टिहरी गढ़वाल जनपद के मुनेठ गांव की हकीकत विस्थापन की त्रासदी और…
नेशनल हिल्स पार्क : 37 गांवों के वाशिंदों को हटाकर जानवरों को बसाने का फरमान
राजस्थान के चित्तौड़गढ जिले के ब्लॉक भैसरोडगढ में राजस्थान सरकार ने तीन ग्राम पंचायतों के 37 गांवों के वाशिंदों को हटाकर जानवरों को बसाने के उद्देश्य से नेशनल हिल्स पार्क बनाने का फैसला किया है।
इन गरीब आदिवासियों (भील) को विस्थापित करने का यह दूसरा षड्यंत्र हैं। पहले भारत सरकार द्वारा 1965 में राणाप्रताप सागर बांध बनाया गया जिसके चलते जो…
और पढ़े...