पूर्वी उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेस-वे के ख़िलाफ़ बढ़ता जनाक्रोश
- गंगा एक्सप्रेस वे चूंकि ड्रेनेज पथ को काटेगा इसलिए वाटर शेड की दिशा बदल जायेगी; भूमिगत जल में बढ़ोतरी होगी जो विशाल वाटर शेड के मृदाक्षरण का कारण होगा; वाटर शेड का कटाव एक्सप्रेस वे के एक तरफ पानी के दबाव को बढ़ाएगा तथा दूसरी तरफ भूमिगत जल के रिसाव क्रिया में तीव्रता लाएगा, जिसकी वजह से एक्सप्रेस वे से भयावह कटाव होगा; गंगा एक्सप्रेस वे चूंकि माइक्रो वाटर शेड को एक हजार किलोमीटर में काटेगी इसलिए एक्सप्रेस वे का एक किनारा राजमार्ग के अगल-बगल की विशाल उपजाऊ जमीन पर जल भराव होगा।
- एक्सप्रेस वे पर चलने वाली गाड़ियों से लगातार कार्बन डाइआक्साइड, कार्बन मीनो आक्साइड आदि गैसें नदी से निस्तारित होने वाली वाष्पीकरण की रफ्तार को बढ़ाकर जल प्रवाह कम कर देंगी जिससे जल में आक्सीजन की मात्रा घट जएगी। इसके अलावा एक्सप्रेस वे और गंगा के बीच की उपजाऊ भूमि गंगा द्वारा बालू जमाव व मृदाक्षरण से प्रभावित होते गंगा का बेसिन न रह कर बाढ़ क्षेत्र में तब्दील हो जाएगा। इसके चलते हजारों एकड़ का गंगा का उपजाऊ बेसिन क्षेत्र नष्ट हो जएगा।
- उपजाऊ जमीन का गैरकृषि क्षेत्र में चले जाना चिंता का सबसे बड़ा सवाल है। उत्तर प्रदेश में कृषि भूमि का रकबा लगातार कम हो रहा है। वर्ष 1984 में प्रदेश में कृषि भूमि का रकबा 184 लाख हेक्टेयर था जो 2006 आते-आते 168 लाख हेक्टेयर रह गया। हालांकि खाद्यान्न उत्पादन फिलहाल चार लाख मीट्रिक टन पर स्थिर है। लेकिन जहां 2024-25 तक प्रदेश की आबादी करीब 25 करोड़ तक पहुंच जाएगी वहीं खाद्यान्न का उत्पादन और घट जाएगा। उस समय 600 मीट्रिक टन खाद्यान्न की जरूरत होगी। ऐसे में खेती का रकबा घटना घातक होगा।
इलाहाबाद जिले की करछना तहसील के किसान सरकार तथा जे.पी. कंपनी के नापाक गठज