संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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गंगा मुक्ति आंदोलन

नदियों को नाथने के नतीजे

नदियां सिर्फ नदियां नहीं हैं, ये हमारा सांस्‍कृतिक जीवन भी हैं। नदियों का निर्मल जल दोनों किनारों और दियारे की हरी-भरी उर्वर भूमि, फैली रेत, असंख्‍य जीव-जन्‍तु, तरह-तरह के पेड़-पौधे और वनस्‍पतियां और करोड़ों-करोड़ लोग, हंसते, गाते और कभी दुख में आंसू बहाते, सब मिलकर बनता है नदियों का संसार। मनुष्‍य ने इन नदियों से बहुत कुछ पाया है। ये हमारी पालनहार…
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‘गंगा मुक्ति आंदोलन’ की 44वीं वर्षगांठ पर विशेष: चार दशक का ‘गंगा मुक्ति…

‘गंगा मुक्ति आंदोलन’ की 44वीं वर्षगांठ पर सर्वोदय प्रेस सर्विस पर प्रकाशित कुमार कृष्णन का यह विशेष लेख साभार हम…

बिहार में निर्णायक संघर्ष का आगाज़: जहां गंगा सफाई न्याय और लोकतंत्र का मुद्दा है

गोमुख से लेकर गंगासागर तक 2525 किलोमीटर के नदीपथ के दोनों ओर स्थित जनपदों की जलदात्री एवं पवित्र जलवाली गंगा का…