संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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श्रम कानून

किसान आंदोलन: पांच किताबें जिनमें दर्ज है अन्नदाता की बगावत और किस्मत का इतिहास

स्‍वतंत्र भारत के इतिहास में उसकी राजधानी की चौहद्दी पर सबसे लंबे समय तक चले किसान आंदोलन को अब पांच साल पूरे हो गए हैं। आजकल पांच साल में स्‍मृतियां धुंधली पड़ जाती हैं। नई घटनाएं तो दिमाग पर तारी हो ही जाती हैं, ऊपर से अतीत को बदलने की कोशिशें भी हो रही हैं। फिलहाल बड़े जन आंदोलनों से तकरीबन खाली हो चुके इस समाज में पांच साल पहले घटे एक व्‍यापक…
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नये श्रम कानून न केवल मज़दूरों पर हमला है बल्कि कानून के शासन पर मौलिक आघात है:…

न्यू ट्रेड यूनियन इनिशिएटिव (एन.टी.यू.आई) ने मोदी सरकार द्वारा थोपे गए  चारों श्रम संहिताओं की कड़ी निंदा की है।…

UP: श्रमकोड और मनरेगा भुगतान में देरी के विरोध में संगतिन किसान मजदूर संगठन का…

मनरेगा में देरी से मजदूरी भुगतान के लिए कानून के अनुसार तय मुआवजा न मिलने और चार श्रम कोड के विरोध में 20 मई को …

राजस्थान के मज़दूर कंपनियों के हवाले, सरकार ने बदले श्रम कानून

राजस्थान सरकार द्वारा विभिन्न श्रम एवं औद्योगिक कानूनों में संशोधन कमोवेश उन परिस्थितियों में लौटना है जहां से संघर्ष कर दुनियाभर के मजदूरों ने अपने अधिकार प्राप्त किए थे। देशभर की ट्रेड यूनियनों, जनसंगठनों एवं गैरसरकारी संगठनों की इस विषय पर चुप्पी चौकाने वाली है। बढ़ते पूंजीवाद व उपभोक्तावाद की दौड़ में मानव अधिकारों के उल्लंघन की अनदेखी समाज के…
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