कर्नाटक: देवनहल्ली के किसानों की ऐतिहासिक जीत, SKM ने दी बधाई
कर्नाटक सरकार 1777 एकड़ कृषि भूमि को डीनोटिफाई करने के लिए मजबूर हुई
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने देवनहल्ली के किसानों को उनकी उस ऐतिहासिक जीत पर बधाई दिया है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व वाली सिद्धारमैया सरकार को 1777 एकड़ कृषि भूमि को डीनोटिफाई करने के लिए बाध्य किया, जिसे पहले की बीजेपी सरकार ने अधिग्रहण के लिए चिन्हित किया था।
एसकेएम ने संयुक्त होराटा, कर्नाटक और सभी किसान, मज़दूर, छात्र, युवा, महिला तथा दलित संगठनों को भी इस अदम्य संघर्ष के लिए बधाई दिया है, जिसकी बदौलत यह जीत संभव हो सकी। एसकेएम ने मंगलवार, 15 जुलाई को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि किसान संगठनों की एकता, मज़दूर-किसान एकता और ट्रेड यूनियनों के सहयोग ने इस तीन वर्षों से चल रहे संघर्ष में निर्णायक भूमिका निभाई।
विज्ञप्ति के अनुसार, देवनहल्ली में यह भूमि संघर्ष मुआवजे के लिए नहीं, बल्कि उपजाऊ कृषि भूमि की रक्षा के लिए था, जो इसे विशेष और ऐतिहासिक बनाता है। यह ध्यान देने योग्य है कि तत्कालीन भाजपा सरकार ने बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट की बहुफसली उपजाऊ भूमि को रियल एस्टेट माफिया और बिल्डरों के इशारे पर अधिग्रहित करने का प्रयास किया था।
13 गांवों के किसानों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया और उस समय की भाजपा सरकार तथा वर्तमान कांग्रेस सरकार के कुछ मंत्रियों द्वारा आंदोलन को तोड़ने के प्रयासों को नाकाम कर दिया, जिसके अनुसार 3 गांवों को अधिग्रहण से बाहर रखा जाएगा। 26 जून 2025 को पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बर्बर लाठीचार्ज किया और कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके खिलाफ पूरे राज्य में जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई और बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। लेखकों, कलाकारों और नागरिक संगठनों ने भी किसानों के संघर्ष के प्रति एकजुटता प्रकट की। इसके बाद संघर्ष का केंद्र बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में स्थानांतरित हो गया, जहां संयुक्त होराटा, कर्नाटक के बैनर तले हजारों लोग कई दिनों तक डटे रहे। इस आंदोलन में एसकेएम के नेता विजू कृष्णन, दर्शन पाल, राकेश टिकैत, युधवीर सिंह और सुनीलम ने भी भाग लिया।
एसकेएम कर्नाटक के मुख्यमंत्री द्वारा अधिग्रहण की प्रक्रिया रोकने और 1777 एकड़ भूमि को डीनोटिफाई करने के निर्णय का स्वागत करता है। यह जीत पूरे भारत में अन्यायपूर्ण और अवैध भूमि अधिग्रहण के खिलाफ चल रहे हजारों संघर्षों को नई प्रेरणा देगी, जो भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम 2013 का उल्लंघन कर रहे हैं।
एसकेएम ने देश भर के किसानों से अपील करते हुए कहा है कि वे इस ऐतिहासिक संघर्ष की जानकारी को व्यापक रूप से फैलाएं और अपने गांवों व तहसील केंद्रों में जुलूसों और जनसभाओं के ज़रिए इस महान विजय का जश्न मनाएं।
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मीडिया सेल | संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा जारी विज्ञप्ति के आधार पर प्रकाशित