संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad

संविधान दिवस पर चित्रकूट–बाँदा के जनसंगठन एकजुट, प्रस्तावना पाठ के साथ दिखाई जागरूकता

बीते 26 नवंबर को देशभर में संविधान दिवस बड़े हर्सोल्लास के साथ मनाया गया। आज जब नागरिकों के मौलिक अधिकार और उनकी निजता के अधिकार पर संकट की बात हो रही है और एस.आइ.आर के जरिये मताधिकार से वंचित करने का खतरा लोगों के सामने है ऐसे में संविधान का महत्त्व और बड़ जाता है। ऐसे वातावरण में लोगों ने संविधान दिवस मना कर अपने अधिकारों और लोकतंत्र के प्रति अपने विश्वास का प्रदर्शन किया है। खासकर वंचित और शोषित समुदाय के पास संविधान ही एक मात्र शक्ति है। संविधान ही उनके जीवन का आधार है। गौरतलब है कि वर्तमान सत्ता और उससे जुड़े हुए कुछ लोगों ने संविधान में बदलाव की बात कह कर लोगों के मन में एक आशंका और असुरक्षा की भवना का निर्माण किया है। ऐसे में लोगों ने संविधान दिवस मना कर अपने अधिकारों के प्रति सजग होने का सन्देश दिया है।

देश भर में तमाम नागरिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने पूरे जोश और हर्ष के साथ संविधान दिवस मनाया। उन्हें संविधान निर्माता भीम राव आंबेडकर को स्मरण करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया और संविधान के प्रस्तवना का पाठ किया। उत्तर प्रदेश के कुछ सामाजिक और नागरिक संगठनों ने भी संविधान दिवस मनाया. चित्रकूट स्थित कुछ संगठनों ने भी संविधान दिवस पर कार्यक्रम किया, जैसे, दलित महिला समिति, दिया महिला मंच, दस्तक महिला मंच, एकता मंच, दलित आदिवासी जनसंगठन आदि ने  समुदायों के बीच संविधान दिवस मनाया और उन्हें संविधान की जानकारी दी। रैली निकाली गई, संविधान की उद्देशिका का पाठ किया गया। मौलिक अधिकारों की जानकारी दी गई।

दलित महिला समिति, चित्रकूट स्थित एक जनसंगठन है जो मुख्य रूप से दलित समुदाय के लिए कार्य करता है और इस संगठन का कार्यक्षेत्र चित्रकूट हैं। संगठन ने संविधान दिवस मनाया और कहा कि उनके संगठन द्वारा दो क्लस्टरों सरैया और भरकोर्रा में संविधान दिवस बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया। इस समारोह में संगठन की  बहनों ने भारी संख्या में भाग लिया। इस मौके पर सामूहिक रूप से संविधान की उद्देशिका पढी गई इसके साथ रैली निकाली गई और अलग उपस्थित लोगों द्वारा संविधान के प्रस्तावना पर चर्चा करते हुए बताया गया संविधान क्यों कैसे बना किसने बनाया हमारे जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण है हमारे मौलिक अधिकार संविधान से मिले। साथ ही बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी और संविधान की जय बोलते हुए गीत गए गए-

“तेरी जय हो भीम महान बना दिया भारत का संविधान

तूने मनु विधान जलाया भारत का संविधान बनाया तूने पाया जग में मन बना,,,,,,,,,,,,

तूने भारत की सब नारी शोषित पीड़ित दलित उभारी उनको दे अधिकार समान बना दिया भारत का संविधान।”

उसी तरह चित्रकूट स्थित एक और संगठन है दस्तक महिला मंच। यह संगठन महिलाओं के मुद्दों पर काम करता है। इस संगठन ने मानिकपुर ब्लाक के तहत डांडी गांव में दस्तक महिला मंच की महिलाओं के साथ संविधान दिवस मनाया। संगठन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम में संविधान की उद्देशिका पढ़ने के बाद बाबा भीम राव अम्बेडकर की तस्वीर में फूलर्पण किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित साथियों को बताया गया कि, संविधान हमारे देश का ग्रंथ है जो हर नागरिक को हक अधिकारों के साथ साथ कर्तव्यों के निर्वहन करने की प्रेरणा देता है, साथ ही हमारा संविधान नागरिक को न्याय, स्वतंत्रता, समानता के साथ साथ आपसी भाईचारा और अवसर को समता भी देता है। संविधान हमे देश में परिवर्तन लाने का अधिकार देता है।

“आज हम यह संकल्प लेते हैं कि कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने अधिकारों के लिए लड़ते रहे हैं और लड़ते रहेंगे । गरिमा और सम्मान को बनाए रखेंगे – स्वयं, परिवार, समाज शामिल है।”

जब तक सूरज चांद रहेगा,
तब तक संविधान रहेगा

संवैधानिक मूल्यों को अपनायेंगे
रुढ़िवादी सोंच को जड़ से मिटायेंगे

कुरान कहता है मुस्लिम बनों
बाइबल कहता है इसाई बनों
हमारा संविधान कहता है इंसान बनों

मैं उसी धर्म को मानती हूं जो मुझे स्वतंत्रता समानता और आपस में भाईचारा रखना सिखाता है।

दिया महिला मंच ने भी संविधान दिवस समरोह का आयोजन किया और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। दिया महिला मंच भी चित्रकूट स्थित एक महत्वपूर्ण जनसंगठन है और संगठन मुख्य रूप से महिलाओं के मुद्दे पर काम करता है। इनका कार्यक्षेत्र कर्वी और बाँदा है। इस कार्यक्रम के बारे में संगठन द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि,

उच्च प्राथमिक विद्यालय संग्रामपुर तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय बालापुर माफी में 26 नवंबर को  भारतीय संविधान दिवस कार्यक्रम गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर तथा संविधान सभा के सदस्यों को पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।

इसके बाद दोनों विद्यालयों के छात्रों, शिक्षकों एवं उपस्थित अतिथियों ने भारत के संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का सामूहिक वाचन किया। इस अवसर पर संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों पर चर्चा की गई और छात्रों को संवैधानिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संकल्प दिलाया गया।

विद्यालयों में आयोजित विविध गतिविधियाँ — जैसे निबंध लेखन, भाषण प्रतियोगिता, पोस्टर निर्माण,  तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ -छात्रों में विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पुरस्कार प्रदान किए गए।

प्रधानाध्यापकों ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान दिवस जैसे कार्यक्रम छात्रों में नागरिक चेतना, अधिकारों एवं कर्तव्यों की समझ को सुदृढ़ करते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर  रामप्रकाश, परियोजना समन्वयक – दीया वेलफेयर सोसाइटी, चित्रकूट, ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं छात्रों का हार्दिक आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर संस्था की कार्यकर्ता शान्ति लक्ष्मी, गायत्री देवी, ललिता देवी, अर्चना देवी, तथा सोना देवी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

उसी तरह बाँदा विकास खंड के तहत बदौसा स्थित एक और संगठन दलित आदिवासी जनसंगठन ने भी संविधान दिवस का आयोजन किया तथा महिला हिंसा के खिलाफ जागरूकता रैली निकली गई।

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