संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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किसान आंदोलन

गुजरात : पेप्सिको विवाद और कांट्रेक्ट फार्मिंग

-गिरिश मालवीय नील की खेती याद है आपको!, 1917 का चंपारण आंदोलन जिसने मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा गाँधी बना दिया था वह नील की खेती से ही जुड़ा हुआ आंदोलन था, बिहार में अंग्रेजी सरकार किसानों से जबर्दस्ती नील की खेती करने को बाध्य करती थी ..........अब गोरे अंग्रेज चले गए और अब काले अंग्रेजों का शासन आ गया है अब स्वतंत्र भारत मे मोदी सरकार नील की…
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नेशन फॉर फार्मर्स : कृषि संकट पर संसद में विशेष सत्र की माँग के लिए राष्ट्रीय…

कृषि संकट पर संसद में विशेष सत्र की माँग के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन 1 से 3 मार्च, 2019 इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई…

महाराष्ट्र : एक बार फिर सड़क पर उतरे किसान, नासिक से मुंबई तक करेंगे मार्च

इससे पहले मार्च 2018 को किसानों ने अपनी मांगों के साथ नासिक से मुंबई तक लंबी रैली की थी. आरोप है कि महाराष्ट्र की…

राजस्थान : जिंदा मक्खी निगलने को मजबूर कुतुबपुरा के निवासी; कान में तेल डालकर बैठा प्रशासन

मनदीप पुनिया / जितेंद्र चाहर राजस्‍थान में शुक्रवार को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है और झुंझनूं जिले की एक एक पंचायत में महीने भर से धरने पर बैठे लोगों ने चुनाव का बहिष्‍कार करने का नारा दे दिया है क्‍योंकि उनकी जिंदगी मक्खियों ने तबाह कर दी है। अफसरों से लेकर नेताओ तक सबसके चक्‍कर लग चुके हैं लेकिन कुतुबपुरा के लोग अब भी जिंदा मक्‍खी निगलने…
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किसान मुक्ति मार्च : AIKSCC ने जारी किया भारतीय किसानों का घोषणापत्र

भारतीय किसानों का घोषणापत्र अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति द्वारा आयोजित ऐतिहासिक किसान मुक्ति मार्च के…

सावधान मोदी सरकार! किसान आ रहे हैं : कृषि विरोधी नीतियों के खिलाफ देश भर के…

29 नवम्बर के मार्च में शामिल किसानों का अभिनंदन करो 30 नवम्बर को संसद मार्ग पर किसान रैली में शामिल हों दिल्ली 27…

मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ देश भर के किसानों का दिल्ली कूच 29-30 नवंबर 2018

नई दिल्ली. 2014 के लोकसभा चुनाव में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा ने देश के किसानों से कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुरूप फसलों का डेढ़ गुना दाम देने का वायदा किया था. यही नहीं उन्होंने देश के लोगों को अच्छे दिन लाने का वायदा भी किया था. पर अपने साढे चार साल के शासन में इस सरकार ने न सिर्फ देश के किसानों के…
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दिल्ली में फिर होगा किसान आंदोलन : 28 नवंबर को देश भर के किसानों का दिल्ली कूच

नई दिल्ली: देश भर के किसान अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर दिल्ली का रुख करेंगे. अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति के…

मोदी जी ! पिछले एक साल से फसल बीमा का एक रुपया भी नहीं मिला किसानों को

24 जुलाई 2018: जन आन्दोलनों का राष्ट्रीय समन्वय की बिहार राज्य इकाई ने मोदी सरकार द्वारा बहुप्रचारित प्रधानमंत्री…

कॉर्पोरेट खेती की ओर बढ़ता भारत : न रहेगा किसान न किसानी का संकट

शायद भारत अब किसानोंका देश नहीं कहलायेगा। यहां खेती तो की जायेगी लेकिन किसानों के द्वारा नही, खेती करने वाले कार्पोरेट्स होंगे, कार्पोरेट किसान। पारिवारिक खेती की जगह कार्पोरेट खेती। आज के अन्नदाता किसानों की हैसियत उन बंधुआ मजदूरों या गुलामों की होगी, जो अपनी भूख मिटाने के लिये कार्पोरेट्स के आदेश पर काम करेंगे। उनके लिये किसानों की समस्याओं का…
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