संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
.

बांध विरोधी आंदोलन

सरदार सरोवर परियोजना: समीक्षा की अनिवार्यता

सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई 17 मीटर बढ़ाने की अनुमति के साथ ही पुनर्वास की वास्तविकता और विस्थापन की विभीषिका के प्रश्न पुनः चर्चा में आ गए हैं। अनेक दस्तावेज व गांवों में रह रहे चर व अचर सभी यह सिद्ध कर रहे हैं कि पूर्ण पुनर्वास तो दूर अभी तो पूर्ण विस्थापन ही नहीं हुआ है। जबकि कुछ समय पूर्व तक नर्मदा नियन्त्रण प्राधिकरण 'जीरो बैलेस' यानि पूरी…
और पढ़े...

सरदार सरोवर बांध : ऊंचाई बढ़ाने पर न्यायालय द्वारा नोटिस जारी

इंदौर, (सप्रेस)। नर्मदा बचाओ आंदोलन द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा…

बंजर जमीने दिखाकर प्रताड़ित किया जा रहा है विस्थापितों को

सर्वोच्च न्यायलय ने 11 मई 2011 को अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया था कि विस्थापितों को उनकी मूल…

आखिर दिल्ली की प्यास कब बुझेगी?

दिल्ली के निवासियों को ज़िंदा रखने की कीमत हिमाचल के लोग अपनी आजीविका के विनाश और बाँध परियोजनाओं के दुष्प्रभावों के रूप में चुकाने पर मजबूर हैं. दिल्ली की प्यास बुझाने के लिए प्रस्तावित रेणुकाजी बांध परियोजना के जबरर्दस्त विरोध के बावजूद हाल ही में एक और किशाउ बांध परियोजना पर समझौता हुआ हैं जिसका मुख्य उदेश्य दिल्ली को पानी पिलाना हैं. किशाउ…
और पढ़े...

इंदिरा सागर बांध: प्रत्याशियों से पुनर्वास पर रुख स्पष्ट करने को कहा लोगों ने

आगामी मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव के पूर्व इंदिरा सागर प्रभावितों ने नर्मदा बचाओ आन्दोलन के तहत खंडवा,…

डिमना बांध : टाटा के विरोध में विस्थापितों का जल सत्याग्रह

टाटा कंपनी को कालीमाटी से कोरस तक पहुंचने में डिमना बांध के विस्थापितों का क्या योगदान है, किसी को भी पूछा जाय तो स्पष्ट रूप से जवाब आयेगा कि डिमना बांध विस्थापितों ने टाटा कंपनी के विकास के लिए अपने पूर्वजों के गांव को त्याग कर जमीन दिया। बांध से 12 मौजा जलमग्न हैं। विस्थापित परिवार दलमा के तराई पर बसने के लिए मजबूर हुए। आज भी देखा जा सकता है…
और पढ़े...

डिमना बांध : टाटा के विरोध में विस्थापितों का जल सत्याग्रह शुरू

डिमना डेम के पहले यहाँ 12 गाँव हुआ करते थे। जो आज भी हैं बसे हैं पर दुसरी जगह पर । आज जिस तरह से लोग विस्थापन…

सरदार सरोवर बांध : खामियाजा भुगतती नर्मदा घाटी

सरदार सरोवर बांध जलाशय की डूब में आए 200 से अधिक गांवों के लाखों नागरिक पिछले तीन दशकों से मांग कर रहे हैं कि उन्हें पूर्व निर्धारित शर्तों के अनुरूप मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। लेकिन विभिन्न राज्यों की सरकारें सर्वोच्च न्यायालय एवं ट्रिब्यूनल के फैसलों को नजरअंदाज कर मनमानी कर रही हैं। अपनी मूल लागत में 18 गुना वृद्धि के बावजूद बांध निर्माण जारी…
और पढ़े...