संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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बांध विरोधी आंदोलन

पेंच व्यवर्तन परियोजना: संघर्ष जारी और जरुरी हैं – मेधा पाटकर

छिंडवाड़ा जिले में पेंच नदी पर 41 मीटर का बड़ा बांध केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ जी के चुनाव क्षेत्र में राज्य और केन्द्र शासन मिलकर बिना मंजूरी के बना रहे हैं। इसके खिलाफ संघर्ष सीमा पार पहुंचा है। इस परियोजना के क्षेत्र के 31 गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं, लगभग 5600 हेक्टेयर भूमि जो कि किसानों की है इसमें से अधिकांश किसानों की भूमिअर्जन का कार्य पूरा…
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पेंच व्यपवर्तन विरोधी आंदोलन: आंदोलनकारियों पर कसा जिला प्रशासन का शिकंजा

देश के नागरिकों से अपील डॉ. सुनीलम को जेल भेजने के बाद जिला प्रशासन ने पुरे छिंदवाडा क्षेत्र में धारा 144 लागू कर…

डॉ. सुनीलम जेल में: फसल कटाई की मोहलत नहीं, धारा 144 और गाँव खाली करने का आदेश

देश के नागरिकों से अपील मध्य प्रदेश के छिंदवाडा जिले में प्रस्तावित अडानी-पेंच पवार प्लांट परियोजना और पेंच…

हरदा जल सत्याग्रह : जितनी मजबूत, उतनी कमजोर सत्ता

जल सत्याग्रह से लोट कर जानेमाने गाँधीवादी सामाजिक कायकर्ता हिमांशु कुमार की टिप्पणी अभी अभी मध्य प्रदेश से लौटा हूँ ! वहाँ हरदा जिले के खरदना गाँव वालों के एक सत्याग्रह में शामिल होने गया था ! गाँव वालों के साथ करीब अट्ठारह घंटे पानी में खड़ा रहा ! गाँव वाले तो पिछले चौदह दिन से पानी में ही खड़े थे ! कारण यह था कि पहले तो…
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जल सत्याग्रह का 17वां दिन: जल सत्याग्रहियों की जिंदगी दांव पर‎!!11!!

जल सत्याग्रह आंदोलन के समर्थन में आसपास के 250 गांवों के करीब 5000 लोग घोघल गांव में ही जम गए…

जल सत्याग्रह 13 वें दिन भी जारी, देश भर से समर्थन!!

जल सत्याग्रह का यह अनोखा आंदोलन अब काफी जोर पकड़ता जा रहा है और इनके समर्थन में आसपास के 250 गांवों के करीब 5000…

माही बांध विस्थापितों का अभी तक नहीं हुआ पुनर्वास

माही परियोजना निर्माण (1960) के समय विस्थापित हुए 180 गांवों के लोग आज भी दर-दर की ठोकरें खा रहें हैं। पुनर्वास समिति के बैनर तले इन विस्थापितों का आंदोलन आज भी जारी है। मई 2012 में तहसील कार्यालय में माही विस्थापितों की ओर से जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया। जिसमें उन्हें बसाने और उनके खिलाफ होने वाली कार्रवाई को रोकने की मांग उठाई गयी थी।…
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भाखड़ा बांध विस्थापित आर-पार की जंग को तैयार

भाखड़ा बांध विस्थापितों की सभी कमेटीओं की बैठाकें 9 जून को मलराओं तथा 10 जून कोसरियां व वाला गाँव में संपन हुई. इन…

हिमाचल प्रदेश के जनसंघर्ष: न्याय के लिए बढ़ते कदम

हिमाचल प्रदेश का भू-भाग अपनी पहचान एवं इतिहास के लिए एक राज्य के रूप में प्रशासनिक गठन की तारीख का मोहताज नहीं है. प्रकृति के वरदानों से लबरेज यह क्षेत्र मनुष्य एवं प्रकृति के रिश्तों की एक मिसाल तब तक बना रहा जब तक प्राकृतिक संपदा का दोहन मुनाफे के लिए करने वालों का पदार्पण यहाँ नहीं हुआ था. हिमाचल प्रदेश के जनसंघर्ष: न्याय के लिए बढ़ते कदम…
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