संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
.

झारखण्ड

झारखण्ड : विस्थापन विरोधी एकता मंच ने अध्यादेशों की प्रतियां जलायी !

गुजरी 2 फ़रवरी को झारखण्ड के जमशेदपुर के उपायुक्त कार्यलय पर विस्थापन विरोधी एकता मंच एवं प्रगतिशील नागरिक मंच के साझा विरोध-प्रदर्शन के तहत श्रम कानून संशोधन प्रावधानों और भूमि अधिग्रहण अध्यादेश, खान एवं खनिज अघ्यादेश तथा कोयला आंवटन अध्यादेश की प्रतियों जलाया गया. विस्थापन विरोधी एकता मंच के अरविंद अंजुंम ने बताया कि यह कार्यक्रम…
और पढ़े...

झारखण्ड : भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के विरोध में मोदी व सीएम का पुतला फूंका

गुजरी 28 जनवरी को झारखण्ड के रांची में आदिवासी जन परिषद के कार्यकर्ताओं ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश व स्थानीयता…

विस्थापन के विरुद्ध लड़ रहे जन संगठनों का दो दिवसीय सम्मेलन संपन्न

सम्मेलन की रिपोर्ट कोल्हान प्रमंडल स्तरीय विस्थापन के खिलाफ में आंदोलनकारी साथियों का सम्मेलन दिनांक 29 एंव 30 सितम्बर 2014, को तेंतला गांव के ग्राम सभा भवन में संपन्न हुआ। यह सम्मेलन कोल्हान के विस्थापन विरोधी एकता मंच के बैनर तले 29 सितम्बर 2014 को पूर्वाह्रा 11 बजे से कुमार चन्दमार्डी की अध्यक्षता में प्रारम्भ किया गया। पहले सत्र…
और पढ़े...

झारखंड में विरोध के बावजूद जिंदल के स्टील प्लांट को हरी झंडी, आंदोलनकारियों पर…

जिंदल के स्टील प्लांट पर मार्च 8, 2014 को असनबोनी, जिला-सिंहभूम (झारखण्ड) में सरकार ने पुलिसिया दमन के…

‘अनिवासी’ सारंडावासी !

झारखण्ड के सारंडा जंगल के बीच तकरीबन सौ गांव ऐसे हैं जिनके बारे में औपचारिक रूप से राज्य या केंद्र सरकार को कोई जानकारी नहीं है. जाहिर है कि तब यहां के निवासियों की गिनती भी राज्य के बाशिंदों में नहीं होती. ये न वनग्राम हैं, न राजस्वग्राम. इस ‘प्रोटेक्टेड फोरेस्ट’ में रहने वाले करीब 25 हजार आदिवासी व अन्य वन निवासी बिना किसी ‘पता’ के…
और पढ़े...

फायरिंग रेंज के खिलाफ सुलगती आदिवासी जनचेतना: नेतरहाट में संघर्ष के इक्कीस साल

देश की सुरक्षा के लिए आदिवासी सिर्फ सेना में ही अपनी जानें नहीं देते, उनकी ज़मीनों भी राष्ट्र की सुरक्षा की भेंट चढ़…

डिमना बांध : हम तो लड़ेंगे साथी, हम न डरेंगे !

गुजरी 30 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2013 तक झारखण्ड के जमशेदपुर शहर के पास डिमना बांध के विस्थापितों ने अपनी चिर लंबित मांगों के समाधान के लिए जल सत्याग्रह किया. ज्ञात हो कि डिमना बांध के लिए 1941 में बिहार के गवर्नर एवं टिस्को के बीच एक करार हुआ था जिसके आधार पर जनहित अर्थात कंपनी एवं नागरिक जरूरतों के लिए इस बांध का…
और पढ़े...