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दिल्ली
हल सत्याग्रह : राजनीति या विवशता
स्वराज अभियान ने किसानों को एकजुट करने का बीड़ा उठाकर अत्यन्त महत्वपूर्ण पहल की है। दिल्ली में एक ही हफ्ते के भीतर किसानों और भूतपूर्व सैनिको पर पुलिस के लाठीचार्ज ने ‘‘जय जवान जय किसान‘‘ के नारे की वास्तविकता (प्रशासन की नजर में) पूरे देश के सामने उधेड़ कर रख दी है। यह देखना होगा कि ‘‘हल सत्याग्रह‘‘ किस तरह किसानों की समस्याओं के 'हल' में मददगार…
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2 सितंबर को मजदूरों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल : समाजवादी समागम का समर्थन
समाजवादी समागम के राष्टृीय संयोजक पूर्व विधायक डॉ सुनीलम प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मजदूरों के केंद्रीय संगठनों…
एफटीआईआई छात्रों की जंतर मंतर पर दस्तक
फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) पुणे के छात्र पिछले 53 दिनों से एफटीआईआई के अध्यक्ष पद पर…
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष : गलत नीतियों की स्वीकार्यता
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा हाल ही जारी अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया गया कि ‘‘छन कर आने वाला‘‘ (ट्रिकल डाउन) का सिद्धांत कारगर साबित नहीं हुआ है। साथ ही मुद्रा कोष की पूंजीवादी एवं मितव्ययता को प्रोत्सहित करने वाली नीतियों से असमानता में उछाल आया है। पेश है जॉन क्वेली की सप्रेस से साभार रिपोर्ट;
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई एफ एम)…
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महाजनी संस्कृति, प्रेमचंद और वर्तमान
प्रेमचंद की 135वीं जयंती पर आदियोग का आलेख;
विकास के भागते पहिये से वह चमक पैदा हुई कि आजादी की आधी सदी…
भूमि अधिग्रहण विधेयक वापस लेने की मांग तेज
भूमि अधिग्रहण विधेयक के विरोध में जन संघर्षों की जनसुनवाई भूमि अधिकार आंदोलन के बैनर तले दिल्ली के…
भूमि अधिग्रहण अधिनियम के विरोध में जन संघर्षों की जनसुनवाई : 23 जुलाई 2015, नयी दिल्ली
जन सुनवाई 23 जुलाई 2015, 10: 00 बजे
स्थान : मुक्तधारा, भाई वीर सिंह मार्ग,
गोल मार्किट के पास,
नई दिल्ली
1 जुलाई 2015, को भूमि अधिकार आन्दोलन की वर्किंग कमेटी की एक बैठक, 36, कनिंग लेन में हुई थी. इस बैठक में यह तय हुआ था कि 21 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के दौरान, भूमि-अधिकार आंदोलन की ओर से एक जन सुनवाई का आयोजन किया जाएगा.…
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मोदी सरकार को शिकस्त देता भूमि अधिग्रहण का मुद्दा
“सरकार पर 'किसान विरोधी' होने का दाग लगवाकर भी भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव की जिद्द पर अड़े प्रधानमंत्री…
मोदी के डिजिटल इंडिया का वर्तमान सच
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही अपने एक और सपने डिजिटल इंडिया को मूर्त रूप देने का उपक्रम शुरु किया है। इसकी सफलता…
ग्रीस : लोकतंत्र में गरिमा की वापसी
ग्रीक त्रासदियों के लिए विख्यात यूनान (अब ग्रीस) ने इस बार सुखांत करके सिद्ध कर दिया है कि आधुनिक लोकतंत्र के इस जनक देश में ढाई सहस्त्राब्दी से चली आ रही लोकतंत्र की जड़ें अभी कमजोर नहीं हुई हैं। ग्रीस में हुए जनमत संग्रह का परिणाम विश्वभर में लोकतंत्र व राष्ट्रों की सम्प्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखने में मददगार होगा। ग्रीस के जनमतसंग्रह के परिणाम…
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