संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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दिल्ली

जमीन की लड़ाई पहुंची दिल्ली : आर-पार का संघर्ष करने का मन बना चुके हैं देश के किसान

पुर्जा-पुर्जा कट मरे, कबहूं न छाड़े खेत! अभिषेक श्रीवास्‍तव करीब तीन हफ्ते पहले की बात है जब दिल्‍ली की चुनावी सरगर्मी के बीच एक स्‍टोरी के सिलसिले में हम कम्‍युनिस्‍ट पार्टियों के सुनसान दफ्तरों के चक्‍कर लगा रहे थे। मतदान से ठीक एक दिन पहले 36, कैनिंग लेन में जाना हुआ जहां मार्क्‍सवादी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी (माकपा) की किसान सभा का…
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कारपोरेट दलाल मोदी सरकार के ‘अध्यादेशराज’ के खिलाफ दिल्ली में गूंजी किसानों की…

24 फ़रवरी 2015 को देश के कोने-कोने से जबरिया भू-अधिग्रहण के खिलाफ 350 से भी ज्यादा जनांदोलनों के मोर्चे पर…

किसान-मज़दूर विरोधी भू-अध्यादेश के विरोध में आंदोलन तेज, ट्रेड यूनियन और राजनीतिक दल एकजुट !

देश के संवैधानिक ढाँचे पर हमला है भू-अधिग्रहण अध्यादेश कंपनियों द्वारा किसानों के ज़मीनों की लूट को आसान बनाने की सरकारी कोशिश है भू-अध्यादेश पूरे देश में खड़ा होगा अध्यादेश के विरोध में प्रतिवाद, संसद सत्र में धरना गुजरी 23-24 जनवरी 2015 को केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2014 के आखरी हफ्ते में लाये गए भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के विरोध में…
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काले अध्यादेशों, प्राकृतिक संपदाओं की कम्पनी लूट की खुली छूट और जन-प्रतिरोध…

प्राकृतिक संपदा हमारा जन्म सिद्ध अधिकार हैं जा़लिम को जो न रोके, वो शामिल है ज़ुल्म में…

ग्रीनपीस : प्रिया पिल्लई को दिल्ली एयरपोर्ट पर रोका

नई दिल्ली, 11 जनवरी 2015। सरकार द्वारा एक बार फिर से ग्रीनपीस के खिलाफ कठोर नीति अपनाने की घटना सामने आयी है। आज…

दिल्ली : इस्पात उद्योग मज़दूर हुंकार रैली

अभी तो ली अंगड़ाई है! आगे और लड़ाई है!! दिल्ली के वज़ीरपुर औद्योगिक इलाके में 7 जनवरी 2015 को मज़दूर हुंकार रैली के माध्यम से औद्योगिक इलाके के मज़दूरों तक एकजुटता का सन्देश दिया गया. वज़ीरपुर औद्योगिक इलाके के राजा पार्क में ही सभा की गयी, सामूहिक रसोई के माध्यम…
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भू-अधिग्रहण अध्यादेश को रद्द कराने के लिए देश भर में होगा किसान आंदोलन : डॉ सुनीलम

भूमि अधिग्रहण का अध्यादेश भाजपा का किसानों के प्रति रुख को साफ़ करता है ! अध्यादेश की प्रति मिलते ही यह बिलकुल…

महिला नसबंदी : औरतों के शरीर पर हमला

भारत में परिवार नियोजन की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं पर थोप दी गई है। नसबंदी कराने वालों में से 98 प्रतिशत महिलाएं ही हैं। वहीं दूसरी ओर जिन परिस्थितियों या शिविरों में यह आपरेशन किए जाते हैंं वह महिलाओं के प्रति हमारे असम्मानजनक रवैय्ये को ही सामने लाता है। इस विषम परिस्थिति की असलियत को सामने लाता कल्पना मेहता का महत्वपूर्ण आलेख जिसे हम सप्रेस से…
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