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दिल्ली
6 अगस्त हिरोशमा बरसी : परमाणु ऊर्जा से मानवजाति की तबाही की कीमत पर फल रहा साम्राज्यवाद
दुनिया भर में शासक वर्ग परमाणु ऊर्जा की खातिर अपने देश की जनता को तबाही की कगार पर ढकेल रहा है। हिरोशिमा, नागासाकी, चेर्नोबिल और फुकुशिमा, भोपाल इस तबाही का जीता-जागता सबूत है। भारत का शासक वर्ग भी अपने मुनाफे के लिए जब पूरी दुनिया में परमाणु रिएक्टरों का विरोध हो रहा है तब विकसित देशों का परमाणु भार जबरन अपनी देश की जनता पर थोप रहा है। तुहिन देब…
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दलित शोषित मुक्ति मंच की बैठक में शामिल हुए देश भर के सामाजिक संगठन
-रविकांत
नई दिल्ली 5 अगस्त 2018 को 'केरला भवन' में "दलित शोषित मुक्ति मंच" की महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमें देशभर…
बुलेट ट्रेन क्यों? कौन चुकाएगा कीमत? 2 अगस्त 2018, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया,…
भूमि अधिकार आंदोलन
आमंत्रण / जनसभा
गलत प्राथमिकताएं या सत्ता का दंभ:
बुलेट ट्रेन क्यों? कौन चुकाएगा कीमत?
2…
कॉर्पोरेट खेती की ओर बढ़ता भारत : न रहेगा किसान न किसानी का संकट
शायद भारत अब किसानोंका देश नहीं कहलायेगा। यहां खेती तो की जायेगी लेकिन किसानों के द्वारा नही, खेती करने वाले कार्पोरेट्स होंगे, कार्पोरेट किसान। पारिवारिक खेती की जगह कार्पोरेट खेती। आज के अन्नदाता किसानों की हैसियत उन बंधुआ मजदूरों या गुलामों की होगी, जो अपनी भूख मिटाने के लिये कार्पोरेट्स के आदेश पर काम करेंगे। उनके लिये किसानों की समस्याओं का…
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देश भर के किसानों ने पारित किया मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव : उपज के सही…
https://www.youtube.com/watch?v=U99iPE360Oc&t=23s
20 जुलाई 2018, नई दिल्ली : देश भर के करीबन 200 किसान…
30 नवंबर 2018 को देश भर के किसानों का दिल्ली कूच : अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय…
14 जुलाई 2018, नयी दिल्ली। 193 किसान संगठनो द्वारा बनाये गये, अखिल भारतीय किसान संघर्ष कॉर्डिनेशन कमेटी (AIKSCC) ने…
राष्ट्रीय सम्मेलन : भूमि-वन-पर्यावरण कानूनों में प्रतिकूल और जन विरोधी संशोधनों की पोल खोल; 9 जुलाई 2018, दिल्ली
साथियों,
वर्षों के लम्बे संघर्ष के बाद 2013 में भूमि अधिग्रहण क़ानून, 1894 रद्द हुआ और उचित मुआवजे का अधिकार, भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता, विस्थापन और पुनर्वास अधिनियम, 2013 (जिसे 2013 का भूमि कानून के रूप में भी जाना जाताहै) पारित हुआ।
क़ानून पूरी तरह जनपक्षिय नहीं था लेकिन फिर भी परियोजना प्रभावितों के हित की बात, और कई हद तक किसानों तथा…
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पेसा : आदिवासी क्षेत्रों में परंपरागत स्वशासन को क़ानूनी मान्यता देने वाला कानून
-घनश्याम
पेसा कानून संविधान संधोशन से बना एक ऐसा कानून है जिसे लोकसभा और राज्य सभा ने भारी बहुमत से पारित किया था 1996 में। 24 दिसंबर 1996 को पारित यह कानून महज कानून नहीं है बल्कि आदिवासी इलाके खासकर पांचवीं अनुसूची के आदिवासी इलाके के लिए परंपरागत ढंग से जीने का एक संविधान है। पेसा कानून का अर्थ है- ''पंचायत राज एक्सटेंशन टू…
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