संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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राज्यवार रिपोर्टें

जल सत्याग्रह का 27वां दिन : भोपाल में ओंकारेश्वर बाँध विस्थापितों का प्रदर्शन

आज 7 मई को 27 वें दिन जल सत्याग्रह जारी है, 26वें दिन भोपाल में सैकड़ो ओंकारेश्वर बाँध विस्थापितों द्वारा विशाल प्रदर्शन किया गया। बोर्ड ऑफिस चौराहे प्रदर्शन के बाद विस्थापितों द्वारा वापस किये गए मुआवजे के डिमांड ड्राफ्ट की माला मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को भेजी गयी । प्रदर्शन में भोपाल के अनेक जन संगठनो और आम आदमी पार्टी के…
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संघर्ष की तस्वीर हुई थोड़ी और साफ़, किसानों ने भू-हड़प बिल के खिलाफ छेड़ी निर्णायक जंग

पिछले कई महीनों से ज़मीन अधिग्रहण अध्यादेश के मुद्दे मोदी सरकार के खिलाफ चल रही लड़ाई का स्वरुप आज दिल्ली के जंतर…

नर्मदा के संतानों की रूहें !

- जावेद अनीस कई सालों से देश के किसान मुसलसल आत्महत्या कर रहे हैं लेकिन किसानों के इस देश में यह एक मुद्दा तब बन पाया जब एक किसान का बेटा लुटियंस की दिल्ली में ठीक हुक्मरानों के सामने खुदकशी कर लेता है। इसके बाद देश भर में भूमि अधि‍ग्रहण कानून और किसान आत्महत्या से जुड़े मुद्दे कुछ समय के लिए बहस के केन्द में तो आ जाते हैं लेकिन इसकी…
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जल सत्याग्रह का 24वां दिन : सत्याग्रहियों के पैरों की हालत गंभीर

आज 4 मई को 24 वें दिन जल सत्याग्रह जारी है, स्वास्थ्य बहुत ज्यादा ख़राब हो रहा है पर अपने हक के लिए लड़ने का…

जल सत्याग्रह का 22वां दिन : पानी में मनाया मजदूर दिवस

आज 2 मई को 22 वें दिन जल सत्याग्रह जारी है, पैरों में सुजन, तेज शरीर दर्द, जी मतलाना, पैरों में खुजली , बुखार और तेज धुप के बावजूद जल सत्याग्रहियों का अपनी हक की लड़ाई लड़ने का जज्बा कम नहीं हुआ । सब का एक सुर में कहना है अगर सरकार उनकी बात नहीं सुनती तो यही उनकी जल समाधि हो जाएगी । नर्मदा बचाओ आन्दोलन की विज्ञप्ति; 1 मई …
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एक इंच भूमि भी नहीं देगे – महवा भराला भूमि अधिग्रहण विरोधी संघर्ष समिति

राजस्थान के सीकर जिले के नीमकाथाना क्षेत्र के ग्रामीण पिछले तीन वर्ष से रिको के प्रस्तावित ओधोगिक क्षेत्र का…

जल सत्याग्रह का 19वां दिन : सरकार-प्रशासन मदमस्त !

जल सत्याग्रह के साथियों को समर्पित अनिल पुष्कर की कवितायें ! मैं उन आवाजों का गुलाम नहीं जिन्हें रेत पर लिखा गया और वर्षा-प्रपात ने मिटा दिया मैं उन आवाजों का मुरीद हूँ जो पानी पर चढकर बोल रही हैं पाँव के घाव-घाव चीख-पुकार मचा रहे घमासान युद्ध के अजेय-राग बजा रहे हथेलियों पर मेंहदी के दाग सब धुल गए आक्रोश औ’ बगावत का लहू बह रहा है वो…
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