संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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राज्यवार रिपोर्टें

‘अनिवासी’ सारंडावासी !

झारखण्ड के सारंडा जंगल के बीच तकरीबन सौ गांव ऐसे हैं जिनके बारे में औपचारिक रूप से राज्य या केंद्र सरकार को कोई जानकारी नहीं है. जाहिर है कि तब यहां के निवासियों की गिनती भी राज्य के बाशिंदों में नहीं होती. ये न वनग्राम हैं, न राजस्वग्राम. इस ‘प्रोटेक्टेड फोरेस्ट’ में रहने वाले करीब 25 हजार आदिवासी व अन्य वन निवासी बिना किसी ‘पता’ के…
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होली-बजोली पॉवर प्रोजेक्ट का विरोध कर रहीं 32 महिला आंदोलनकारी गिरफ्तार

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में होली-बजोली पॉवर प्रोजेक्ट के विरोध में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठी 32 महिलाओं को…

फायरिंग रेंज के खिलाफ सुलगती आदिवासी जनचेतना: नेतरहाट में संघर्ष के इक्कीस साल

देश की सुरक्षा के लिए आदिवासी सिर्फ सेना में ही अपनी जानें नहीं देते, उनकी ज़मीनों भी राष्ट्र की सुरक्षा की भेंट चढ़ जाती हैं, जबकि इस राष्ट्र में न तो उनकी आवाज़ है और न ही पहचान। नेतरहाट के आदिवासी पिछले इक्कीस साल से राष्ट्रभक्ति के नाम पर अपनी जीविका का सौदा करने के खिलाफ संघर्षरत हैं और नक्सलवाद से निज़ात दिलाने के नाम पर एक बार फिर उनकी ज़मीन…
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ग्रीन ट्रिब्युनल ने गोरखपुर परमाणु संयंत्र पर माँगा जवाब, सुनवाई शुरू

गुजरी 12 मार्च 2014 को राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्युनल के माननीय जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली मुख्य बैंच…

एक तरफ दीवार, दूसरी तरफ नहर और बीच में रहने को मजबूर लोग

बिहार की राजधानी पटना में टेश लाल वर्मा नगर झोपड़पट्टी है। यहां पर रहने वाले 274 परिवार के ऊपर विस्थापन की तलवार लटकी हुई है। विस्थापन के विरोध में गांधी, विनोबा, जयप्रकाश आदि के बताये मार्ग पर सत्याग्रह भी किया । जिस तरह ऐतिहासिक गांधी मैदान में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हालही में…
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अपनी जमीन पर बिता रहे विस्थापित जिन्दगी, कहानी पिढ़रवा गांव की

नये साल के पहले हफ्ते में जब भोपाल में शिवराज सिंह चौहान के मंत्री और विधायक विधानसभा में शपथ ले रहे थे, राज्य…

चुटका के आदिवासी आएँगे दिल्ली, उठाएंगे परमाणु प्लांट के खिलाफ आवाज़

पिछले महीने मध्य प्रदेश सरकार ने चुटका परमाणु प्लांट के व्यापक विरोध को दर किनार करते हुए पर्यावरणीय जन सुनवाई को…

अपनी ही ज़मीन पर काम को तरसते आदिवासी !

झारखंड़ के धनबाद में स्थानीय आदिवासी गुजरी 31 दिसम्बर 2013 से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं यह आदिवासी अपनी ही भूमि पर सरकार द्वारा जबरदस्त स्थापित भारत कुकिंग कोल लिमिटेड़ (बी.सी.सी.एल.) प्लांट में रोजगार मांग रहे है, यहाँ पर भी झारखंड़ के अन्य मामलों की तरह मनमाने तरीके से भूमि अधिग्रहण और विस्थापितों के अधिकारों का हनन बदस्तूर जारी…
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