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राज्यवार रिपोर्टें
कूडनकुलम: दमन, उत्पीड़न जारी, मानवाधिकार कार्यकर्ता गिरफ्तार
कूडनकुलम परमाणु परियोजना के खिलाफ जारी पुलिसिया दमन की जांच पडताल करने के लिय जा रहे विस्थापन विरोधी जनविकास आंदोलन के झारखंड इकाई के संयोजक दामोदर तुरी सहित 11 लोगों को 12 अक्टुबर 2012 की सुबह तमिलनाडु पुलिस ने हिरासत में ले लेकर जेल भेज दिया है । इस पुरे घटनाक्रम पर अजय कुमार कि रिपोर्ट;
विस्थापन विरोधी जनविकास आंदोलन संगठन की झारखंड इकाई…
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जनता की ताक़त के आगे झुकी सरकार
जन सत्याग्रह की जीत हुई। गांधी जयंती के अगले दिन, गुज़री 3 अक्टूबर को ग्वालियर से इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरूआत…
परमाणु नहीं, सौर ऊर्जा चाहिए
विदेशी बाजे के शौक़ीन हमारे हुक़्मरान
डा. राजेंद्र प्रियदर्शी लखनऊ में रहते हैं और जाने-माने परमाणु भौतिकविद…
विदेशी बाजे के शौक़ीन हमारे हुक़्मरान
डा. राजेंद्र प्रियदर्शी लखनऊ में रहते हैं और जाने-माने परमाणु भौतिकविद हैं। उन्होंने 1955 से 1960 तक स्टाकहोम स्थित स्वीडेन के एटामिक एनर्जी स्टेब्लिशमेंट में शोध कार्य किया जिसे दुनिया के अग्रणी नाभिकीय शोध संस्थानों में गिना जाता है। वैज्ञानिक शोध के सिलसिले में वह जर्मनी और कनाड़ा में भी रहे। इसी दौरान उनका मार्क्सवादी साहित्य से परिचय हुआ…
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“राजद्रोह, आतंक-विरोधी क़ानून और लोकतंत्र”
“प्रो. इक़बाल अंसारी मेमोरियल लेक्चर" का दूसरा व्याख्यान
“राजद्रोह, आतंक-विरोधी क़ानून और लोकतंत्र”
इंडियन…
देश को है फिर एक जे पी की जरूरत
आज लोकनायक जय प्रकाश नारायण (जे पी) की 110वीं जयंती है। जे पी के इस जीवन परिचय को जानना जे पी को समझने के लिए…
कोयला सत्याग्रह: ज़मीन हमारी तो कोयला भी हमारा
गांधी जयंती के मौक़े पर छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के कोई 14 गांवों के किसानों ने कोयला क़ानून तोड़ने का साहसी काम किया। कोयले पर अपनी दावेदारी दर्शाने के लिए उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से अपनी ज़मीन से कोयला खोदा। नारा दिया कि ज़मीन हमारी तो कोयला भी हमारा। किसानों का यह क़दम इस नारे को सच में बदले जाने के संघर्ष की शुरूआत था। पेश है इस…
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बीस साल बाद किसानों को मिला इंसाफ़
अभी हाल में आये बिलासपुर उच्च न्यायालय के एक फ़ैसले ने उन किसानों में इंसाफ़ मिलने की आस जगा दी है जिनकी ज़मीन…
खतरनाक विकिरण के साये में उत्तराखंड
कूडनकुलम और जैतापुर में परमाणु-विरोधी आंदोलन को एक तरफ सरकार अंधविश्वास से प्रेरित, अवैज्ञानिक और विदेशी हाथ से संचालित बता रही है, जबकि पूरे हिमालय को घातक विकिरण का शिकार बनाते विदेशी हाथों पर दशकों से चुप्पी साधे हुए है. भारतीय आमजन और हमारे पर्वतों-नदियों तक को अमेरिकी हितों की बलि चढाने पर आमादा सरकार की पोल इस लेख से खुलती है:
45 साल पहले…
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