संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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वनाधिकार

मोदी सरकार कॉरपोरेटस हित में पर्यावरण प्रभाव निर्धारण प्रकिया में बदलाव कर रही

सरकार तथा कम्पनियों की क्रूर चाल के विरोध में न्यायपूर्ण एवं लोकतांत्रिक संघर्ष को गोलबंद करने की जरुरत है। यह प्रस्तावित संशोधन इस जनपक्षीय अधिसूचना के लिए अंतिम कील साबित होने वाला है..... राज कुमार सिन्हा का विश्लेषण वर्तमान लाक डाउन में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने एक बार फिर 12 मार्च 2020 को पर्यावरण प्रभाव निर्धारण प्रकिया 2006 में संशोधन…
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मध्य प्रदेश के आदिवासियों का ऐलान : जंगल उनकी पुरखों की पहचान, नहीं देंगे नागरिकता…

मध्य प्रदेश के बैतूल और हरदा जिले में  3-4 फरवरी 2020 को आदिवासियों की संविधान संशोधन कानून पर हुई एक चर्चा के…

आदिवसियों को जंगलों से उजाड़े जाने का प्रतिरोध करें : देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में…

13 फरवरी 2019 को आदिवासियों को उनके जंगलों से उजाड़े जाने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर भले ही सर्वोच्च न्यायालय…

मध्यप्रदेश : वन भूमि से कब्जा हटाने आए दस्ते का विरोध कर रहे आदिवासियों पर पुलिस…

9 जुलाई को मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के ग्राम सिवल में पुलिस और राजस्व अधिकारी सहित वन अमला पहुंच कर करीब 9…

छत्तीसगढ़ : सुप्रीम कोर्ट के जंगल खाली करने के फैसले के खिलाफ बस्तर में प्रदर्शन

कांकेर (छत्तीसगढ़)- गुजरी 2 जुलाई 2019 को आदिवासी समाज ने रैली निकालकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध कर कहा जल…

अंग्रेजों से भी बेरहम साबित हुई भारत की न्यायपालिका

कुछ लोग इस भ्रम में रहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट या हमारी न्याय व्यवस्था भगवान शंकर के त्रिशूल पर बसी काशी नगरी जैसी न्यारी और भिन्न व्यवस्था है, जबकि यह बारहा सिद्ध हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट शोषण और विषमता पर टिकी हमारी इस लोकतांत्रिक प्रणाली का ही हिस्सा है. झारखंड के नगड़ी में चले आंदोलन के प्रति उसके रवैये से इसका अंदाजा तो लगा था, 16 राज्यों के…
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