संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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विस्थापन विरोधी आंदोलन

छत्तीसगढ़ : कुसमुंडा खदान भू-विस्थापित 40 वर्ष बाद भी रोजगार के लिए भटक रहे हैं; आंदोलन जारी

कुसमुंडा में कोयला खनन के लिए 1978 से 2004 तक कई गांवों के हजारों किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया था। लेकिन अधिग्रहण के 40 वर्ष बाद भी भू-विस्थापित रोजगार के लिए भटक रहे हैं और एसईसीएल दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं। पढ़िए न्यूज़क्लिक से साभार रिपोर्ट; कोयला खनन के लिए दशकों पूर्व भूमि अधिग्रहण में अपनी जमीन खोने वाले भू-विस्थापित आज भी मुआवजे…
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मध्य प्रदेश : बार-बार विस्थापन से मानसिक, भावनात्मक व शारीरिक रूप से टूट रहे…

"जल, जंगल, जमीन ही हमारी सम्पत्ति है। सरकार हमें विस्थापित कर हमारी संस्कृति को ही खत्म कर देना चाहती है। यह तो…

छत्तीसगढ़ : भिलाई स्टील प्लांट के निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन

सेल के अध्यक्ष के नाम दिये पत्र में कहा कारखाना नहीं चलाना है तब छत्तीसगढ़ियों की जमीन वापस करे भूअर्जन अधिनियम के…

छत्तीसगढ़ : स्पात प्लांटों के विस्तार के लिए नियम विरुद्ध कराई जा रही हैं जनसुनवाईयां

-राजेश त्रिपाठी रायगढ़ के तराईमाल में 3 मार्च 2021 को एन.आर.टी.एम.टी. इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की जनसुनवाई  आयोजित की गई. बंजारी मंदिर के मैदान में आयोजित मेसर्स एन.आर.टी.एम.टी. इंडिया प्राईवेट लिमिटेड़, सेक्टर – एल, ओपी जिंदल इंडस्ट्रीयल पार्क, पूंजीपथरा, ग्राम पंूजीपथरा तहसील घरघोड़ा जिला रायगढ़ स्थित प्लांट क्र. 211,213 एवं 212 के विस्तार के…
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‘विकास’ की वजह से विनाश की ओर जाता आदिवासी समुदाय : कान में तेल डालकर…

अब केवल विकास करते रहना ही जरूरी नहीं है, बल्कि अब विकास और विकास नीतियों की समीक्षा जरूरी है। 1986 मे संयुक्त…

सिमिलीपाल टाइगर रिजर्व : बाघों के संरक्षण के लिए आदिवासियों की बलि

सिमिलीपाल टाइगर रिजर्व से विस्थापित किए गए आदिवासियों के बीच बढ़ते असंतोष से अब बाघ संरक्षण और आदिवासियों के निवास…

मध्य प्रदेश : सरकारी उदासीनता से भूखे मरने पर मजबूर मछुआरे; मत्सय विभाग के आदेश के बाद भी बरगी बांध में मत्स्याखेट शुरू नहीं

भोपाल 2 जून 2020। कोविड-19 महामारी के कारण 24 मार्च की मध्य रात्रि से घोषित लाक डाउन के कारण मध्यप्रदेश के पुर्णकलिक लगभग 2 लाख 2 हजार मछुआरा सदस्यों के सामने आजीविका का संकट पैदा हो गया है और रोजगार नहीं होने के कारण उनके जिन्दगी पर विपरीत असर हो रहा है। मछुआरों की इस कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए मछुआ कल्याण एवं मत्सय विभाग मध्यप्रदेश ने 31…
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झारखण्ड : 23 बैठकों के बाद भी नहीं सुलझ सके डिमना बांध विस्थापितों के मुद्दे

सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए लिए गए डिमना डैम की ज़मीन को टाटा कंपनी अपनी निजी जमीन की तरह मानती है। शहर को पीने का…

आदिवासियों की बेदखली का फरमान और जमीन की कारपोरेटी लूट

-सीमा आज़ाद 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में 13 फरवरी को दिया गया एक ऐसा फैसला जंगल में आग की तरह फैला, जिसने लोगों को स्तब्ध कर दिया। यह एक ऐसा फैसला था, जिसके सुनाये जाते समय पीड़ित पक्ष अदालत में मौजूद ही नहीं था। यह फैसला था- देश के 17 राज्यों के वन क्षेत्रों में बसे 10 लाख से ज्यादा आदिवासियों को 24 जुलाई 2019 के पहले उजाड़ने का। फैसले के अनुसार ये…
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