संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad

वीबी–जी–राम–जी विधेयक की प्रतियां जला कर किसान सभा ने देशभर में जताया विरोध

अखिल भारतीय किसान सभा ने लोकसभा में वीबी–जी–राम–जी विधेयक को विपक्ष के हंगामे के बीच, बिना किसी गंभीर बहस या मतविभाजन के, ध्वनिमत से जबरन पारित करने के लिए भाजपा-नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की कड़े शब्दों में निंदा की है। इस तरह की अहंकारी और अलोकतांत्रिक प्रक्रिया, जिसके जरिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को प्रभावी रूप से खत्म किया जा रहा है, एक बार फिर साबित करती है कि भाजपा–एनडीए शासन में लोकतंत्र को पूरी तरह मज़ाक बना दिया गया है। करोड़ों ग्रामीण मजदूरों के लिए काम के कानूनी अधिकार को सुनिश्चित करने वाले इस कड़े संघर्ष से हासिल कानून को मजदूरों, उनके संगठनों और राज्य सरकारों से बिना किसी परामर्श के खत्म करने की कोशिश की गई है, जो इस शासन के मजदूर-विरोधी और तानाशाही चरित्र को उजागर करती है।

अखिल भारतीय किसान सभा, नरेगा संघर्ष मोर्चा, खेत मजदूर यूनियनों के संयुक्त मंच के आह्वान के साथ एकजुटता दिखाते हुए , देश भर की अपनी ग्राम इकाइयों से 19 दिसंबर, 2025 को विधेयक की प्रतियां जलाने का आह्वान किया था। इस आह्वान को संयुक्त किसान मोर्चा का भी समर्थन हासिल था। किसान सभा वाम दलों द्वारा 22 दिसंबर, 2025 को बुलाए गए अखिल भारतीय विरोध दिवस का भी समर्थन करती है और किसानों से अपील करती है कि वे बड़ी संख्या में इसमें भाग लें।

अखिल भारतीय किसान सभा दोहराती है कि वीबी–जी–राम–जी विधेयक एक धोखाधड़ीपूर्ण और प्रतिगामी कदम है, जिसका उद्देश्य मनरेगा के मांग-आधारित काम के अधिकार के ढांचे को कमजोर कर उसे एक विवेकाधीन, योजना-आधारित व्यवस्था से तब्दील कर देगा। महात्मा गांधी का नाम हटाकर आरएसएस-प्रेरित “जी–राम–जी” संक्षेप नाम लाने का प्रयास केवल प्रतीकात्मक नहीं है; इसके साथ ऐसे ठोस बदलाव जुड़े हैं जिनके तहत तथाकथित “कृषि चरम मौसम” के दौरान काम से इनकार कर, रोजगार के दिनों पर सीमा लगाई जाएगी। वित्तीय बोझ राज्यों पर डाला जाएगा, नियंत्रण का केंद्रीकरण किया जाएगा एवं डिजिटल व प्रशासनिक बाधाओं के कारण पहले से झेल जा रहे बहिष्कार और काम से वंचित किए जाने, को कानूनी रूप दिया जाएगा। ऐसे समय में जब यंत्रीकरण, कृषि संकट और बेरोजगारी बढ़ रहा है, यह विधेयक ग्रामीण मजदूरों की सौदेबाजी शक्ति को कमजोर करेगा, विशेषकर महिला मजदूरों के लिए असमानता को गहरा करेगा और मजबूरी के कारण होने वाले पलायन को तेज करेगा।

अखिल भारतीय किसान सभा सभी लोकतांत्रिक ताकतों, मजदूरों, किसानों, खेत मजदूरों, महिलाओं और युवाओं के संगठनों से आह्वान करती है कि वे एकजुट होकर प्रतिरोध करें और वीबी–जी–राम–जी विधेयक को तत्काल वापस लेने की मांग करें। साथ ही मनरेगा को एक कानूनी अधिकार के रूप में कम से कम 200 दिनों के काम तथा सम्मानजनक मजदूरी के साथ मजबूत करने के लिए संघर्ष करें।

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