संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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आदिवासी

छत्तीसगढ़ : कोयला खनन में पेसा कानून की अनदेखी पर फिर उठे सवाल, सरकार और ग्रामीण आमने-सामने

कोयला खनन के वास्ते केंद्र सरकार ने बीते दिसंबर महीने में 1957 में बने कानून का उपयोग करते हुए कोरबा जिले के मदनपुर इलाके में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरु कर दी। छत्तीसगढ़ राज्य के खनिज सचिव ने जनवरी में पत्र लिखकर इसपर आपत्ति जताई है। ग्रामीणों के अनुसार उनका क्षेत्र पांचवी अनुसूची के दायरे में आता है जहां ग्राम-पंचायतों को पेसा कानून के तहत…
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आदिवासियों के साथ ऐतिहासिक अन्याय को दुरुस्त करते करते अन्याय को स्थाई कर दिया सर्वोच्च न्यायालय ने

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आदिवासियों को वन भूमि से हटाने के दिए गए निर्देश ने संविधान और संवैधानिक मूल्यों के प्रश्न को राष्ट्रीय पटल पर लाकर खड़ा कर दिया गया। आदिवासियों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को दुरुस्त करने के लिए 2006 में बनाए गए वनाधिकार अधिनियम को पूरी तरह से ताक पर रखते हुए आज लाखों लाख आदिवासियों को विस्थापन के कगार पर लाकर…
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मोदी सरकार की उपेक्षा के कारण 20 लाख आदिवासी परिवारों के सामने पैदा हुआ अस्तित्व…

केन्द्र की उदासीनता से आदिवासियों के अस्तित्व पर खतरा-रनसिंह परमार केन्द्र की उपेक्षा के कारण आदिवासियों के…

सुप्रीम कोर्ट का फरमान : इक्‍कीस राज्‍यों के दस लाख आदिवासी खाली करें ज़मीन

सुप्रीम कोर्ट ने बीती 13 फरवरी को एक बेहद अहम फैसला सुनाते हुए 21 राज्‍यों को आदेश दिए हैं कि वे अनुसूचित जनजातियों…

झारखण्ड : जेलों में दम तोड़ती प्राकृतिक संसाधनों से वंचित जिंदगियां

-स्टेन स्वामी अधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) ने जुलाई 2017 की रिपोर्ट में कहा था कि उनके परीक्षणों के दौरान लगभग 2,80,000 भारतीय जेल में हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि कई वर्षों से जेलों में कई लोग लापरवाही कर रहे हैं, कुछ अपराध या अपराधों की अधिकतम सजा से अधिक लंबे समय तक हैं। अधिकार समूह ने कहा कि इन कैदियों को…
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जयपुर की महापंचायत से हुआ एलान : दलित, अल्पसंख्यक, आदिवासी विरोधी भाजपा को हराना…

दलित, आदिवासी, अल्पसंखयक दमन प्रतिरोध आन्दोलन २२ जुलाई जयपुर में हुई सफल महापंचायत नेतृत्व रहा श्री प्रकाश…

झारखण्ड सरकार द्वारा घोषित स्थानीयता निति के विरोध में संताल आदिवासियों की…

-सच्चिदानंद सोरेन 1 मई 2016, झारखण्ड के दुमका(स.प.)राजबांध पंचायत के राजबांध गांव में ग्रामीणों ने झारखण्ड…

राजस्थान : 21 गांवों के आदिवासियों की आजीविका व अस्तित्व का संघर्ष !

डूंगरपुर (राजस्थान) के हजारों आदिवासियों ने अपने शारीरिक श्रम व पूंजी लगाकर हजारों हेक्टेयर बंजर जमीन को खेती लायक बनाया। वैध दस्तावेज होने के बावजूद सरकार अपने लालच व स्वार्थ के चलते आदिवासियों को उनका हक प्रदान करने में आनाकानी कर रही है। आदिवासियों के परिश्रम व भूमि से जुड़ाव को रेखांकित करता भारत डोगरा का सप्रेस से साभार महत्वपूर्ण…
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