संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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पाँचवी अनुसूची

मध्यप्रदेश: सिंगरौली में आदिवासियों को नजरबंद कर अडानी द्वारा 3 लाख पेड़ काटे जाने खिलाफ किसान संघर्ष समिति ने सौंपा ज्ञापन

किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व विधायक सुनीलम ने कहा कि सिंगरौली जिले के धिरौली क्षेत्र के अमरई, बासी के जंगल की 1400 हेक्टेयर वन भूमि को कोयला खनन के लिए अडानी को सौंपने से सिंगरौली का पर्यावरण पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। पहले ही सिंगरौली देश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर है। सुनीलम ने कहा कि तीन लाख बीस हजार पेड़ काटने से आठ गांव के हजारों…
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प्राकृतिक संसाधनों की लूट को रोकना-धरती आबा बिरसा मुंडा को सच्ची श्रद्धांजलि

धरती आबा बिरसा मुंडा के समय अंग्रेजों ने आदिवासी कृषि व्यवस्था को सामंती राज्य में बदलने की प्रक्रिया को तेज़ कर…

पेसा कानून : 26 वर्षों से क्रियान्वयन का इंतजार करता आदिवासी स्व-शासन का कानून

-डॉ सुनीलम 24 दिसंबर 2022 को पेसा कानून लागू हुए 26 वर्ष पूरे हो जाएंगे। भारत की संसद में 15 दिसंबर 1996 को पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (पेसा) पारित किया गया। भारत के राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद इसे 24 दिसंबर 1996 को लागू कर दिया गया। पांचवी अनुसूची के 10 राज्यों हिमाचल प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश,…
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छत्तीसगढ़ पेसा नियम 2022 : संवैधानिक प्रावधानों पर नासमझी या शातिराना छल !

-बिजय पांडा छत्तीसगढ़ पेसा नियम, 2022 पर चर्चा करने से पहले जरुरी है कि हम एक बार पेसा कानून के सैद्धांतिक…

पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों के राज्यपालों को गृह मंत्रालय का दिशा-निर्देश

दिल्ली 26 मई 2022। पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों (राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, उड़ीसा, गुजरात, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना) में राज्यपालों द्वारा अपने संवैधानिक अधिकारों का समुचित पालन नहीं करने के कारण गृह मंत्रालय द्वारा 29 अप्रैल 2022 को राज्यपालों को एक दिशा निर्देश जारी किया गया है। पांचवीं अनुसूची के…
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पच्चीसवें साल में पेसा : ग्राम सभा को सशक्त करने के लिए आया कानून खुद कितना मजबूत!

-कुंदन पाण्डेय पेसा यानी पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) क़ानून 1996 में आया था। इस कानून को…

छत्तीसगढ़ : बघेल सरकार में भी आदिवासियों की जमीन नियम-कानून ताक पर रखकर छीनी जा रही…

कांकेर 18 अप्रेल 2019। छत्तीसगढ़ के  कांकेर जिले में अंतागढ़ तहसील के ग्राम कलगाँव में 30 से अधिक परिवारों को बेदखली…

छत्तीसगढ़ : सवैधानिक हकों और वन संसाधनों पर अधिकारों के लिए ग्राम सभाओं की एकजुटता

24 फरवरी 2019। छत्तीसगढ़ के  कोरबा ज़िले के ग्राम मोरगा में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 13 फरवरी को देश के लाखों आदिवासियों व वन समुदायों के खिलाफ आये आदेश के बाद ग्राम सभाओं का महाजुटान हुआ। अपनी तरह के विशिष्ट आयोजन में लगभग 150 ग्राम सभाओं के प्रतिनिधियों, पंचायती राज जन प्रतिनिधियों, संगठन के साथियों व छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री शामिल हुए। यह आयोजन…
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