संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad

छत्तीसगढ़ में लौह अयस्क के खनन के लिए जंगलों की कटाई

छत्तीसगढ़ में देश का 19 फीसदी लौह अयस्क भंडार है और इसके खनन की वजह से पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। छत्तीसगढ़ वन विभाग के मुताबिक बीते कुछ वर्षों में 4,920 हेक्टेयर जंगल की जमीन लौह अयस्क खनन हेतु डायवर्ट की जा चुकी है। बड़े स्तर पर होने वाले खनन के लिए जंगल को साफ करना पड़ता है जिससे पर्यावरण और स्थानीय समुदाय के लिए मुश्किल खड़ी होती है। कुछ…
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किसान आंदोलन के पूरे 13 महीने का ब्योरा : कब, कहाँ, क्या हुआ

‘378’... ये महज़ एक संख्या नहीं बल्कि वो दिन और राते हैं, जो हमारे देश के अन्नदाताओं ने दिल्ली की सड़कों पर गुज़ारी…

छत्तीसगढ़ : जब तक हसदेव के समस्त कोयला खदानों को निरस्त नहीं किया जाता संघर्ष जारी…

हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति द्वारा 10 दिसंबर 2021 को ग्राम मदनपुर में छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी, शहीद…

छत्तीसगढ़ : केंद्र व राज्य सरकार ‘हसदेव अरण्य क्षेत्र’ में कोयला खनन की मंजूरी दे कर अडानी को फायदा पहुंचा रही है

-महिबुल संभवत: देश के सबसे घने जंगल में से एक, हसदेव अरण्य में अडानी को कोयला खदान की मंजूरी दे कर छत्तीसगढ़ सरकार ने साबित किया है कि वो भी भाजपा की केंद्र सरकार के नक़्शे कदम पर चल रही है। खनन परियोजना से प्रभावित आदिवासी समुदाय ने यह आरोप लगाया हैं। दिल्ली के प्रेस क्लब में हसदेव अरण्य क्षेत्र के स्थानीय प्रतिनिधि मंडल और सामाजिक कार्यकर्ताओ ने…
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मध्य प्रदेश : सरदार सरोवर परियोजना से विस्थापित ढाई सौ गांवों की आबादी आज भी अपने ‘पूर्ण-पुनर्वास’ की बाट जोह रही है

करीब आधी सदी में पूंजी और इंसानों के ढेरों संसाधन लगाकर पश्चिमी मध्यप्रदेश में ‘सरदार सरोवर जल-विद्युत परियोजना’ खडी तो कर ली गई है, गाहे-बगाहे उसके गुणगान भी किए जाते हैं, लेकिन उसकी चपेट में आई ढाई सौ गांवों की आबादी आज भी अपने ‘पूर्ण-पुनर्वास’ की बाट जोह रही है। प्रस्तुत है, हाल में उस इलाके की यात्रा करके लौटे आदर्श शर्मा की यह रिपोर्ट;…
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दिल्‍ली में उठी छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य की ग्राम सभाओं की आवाज़

छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य के 1.70 लाख हेक्टेयर के घने जंगल में कोयला खनन के खिलाफ पिछले दस सालों से स्थानीय आदिवासी…

मध्य प्रदेश : बार-बार विस्थापन से मानसिक, भावनात्मक व शारीरिक रूप से टूट रहे आदिवासी

"जल, जंगल, जमीन ही हमारी सम्पत्ति है। सरकार हमें विस्थापित कर हमारी संस्कृति को ही खत्म कर देना चाहती है। यह तो आदिवासियों के साथ अन्याय है।"
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