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पर्यावरण
उड़ीसा : ढिंकिया में जेएसडबल्यू के प्रोजेक्ट पर एनजीटी ने लगाई रोक, प्रदर्शनकारियों को राहत
ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में दिसंबर 2021 से विरोध-प्रदर्शन जारी था। तब प्रशासन ने पान की बेलों को गिराकर गांव की जमीन का अधिग्रहण शुरू किया था। राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी ने अपने आदेश में माना कि जेएसडब्ल्यू परियोजना में भारी निवेश हुआ है, लेकिन टिकाऊ विकास के सिद्धांत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ओडिशा उच्च न्यायालय ने भी परियोजना के लिए…
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गांव तक पहुंचा, कचरे का कहर
कहा जाता है कि शहरी लोग कचरे का सर्वाधिक विसर्जन करते हैं, लेकिन अब यह व्याधि गांवों तक भी पहुंच गई है। प्रस्तुत है, इसी विषय पर प्रकाश डालता कुलभूषण उपमन्यु का यह लेख;
भारतवर्ष में प्रतिदिन 28 करोड़ टन ठोस कचरा पैदा हो रहा है जिसमें से 10.95 करोड़ टन ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहा है। ग्रामीण भारत में तेजी से बदलती जीवन-शैली के चलते शहरी सुविधाएँ…
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जोशीमठ त्रासदी : अगली पीढ़ी के वृक्ष
अपने रहन-सहन और बसाहट के लिए समाज पर्यावरण में हस्तक्षेप करता है, कई बार इसके नतीजे दुखद भी होते हैं, लेकिन आमतौर…
भोपाल गैस त्रासदी – जख्म अभी भरे नहीं हैं !
‘भोपाल गैस त्रासदी’ के 38 वें साल में, उसके प्रति सरकारों, सेठों और समाज की बेशर्म अनदेखी के अलावा हमें और क्या…
पांच राज्यों में चुनाव : खारिज होता पर्यावरण
पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में मतदाताओं को लुभाने हेतु दिये आश्वासनों या घोषणाओं में पर्यावरण सुधार की कहीं, कोई चर्चा नहीं की गयी है। हमेशा की तरह वे सभी धतकरम किए जा रहे हैं जिन्हें हमारे मौजूदा तर्ज के लोकतंत्र ने आत्मसात कर लिया है, लेकिन क्या इस धमा-चौकड़ी में हमारे जीवन के लिए जरूरी पर्यावरणीय मुद्दों को कोई तरजीह दी जा…
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