.
छत्तीसगढ़
हादसे के लिए जिंदल जिम्मेदार
गुजरी 7 मार्च को रायगढ़ में दर्दनाक घटना हुई। काम के दौरान पांच मजदूरों पर धधकती राख की बरसात हुई। जब तक उन्हें मलबे से उन्हें निकाला जाता, उनमें से चार दम तोड़ चुके थे। पांचवां मजदूर बुरी हालत में था, उसकी सांस भर चल रही थी। फिलहाल, उसके बचने के आसार नहीं दिखते। यह हादसा जिंदल के पावर प्लांट में हुआ। पेश है संघर्ष संवाद की यह रिपोर्ट:…
और पढ़े...
जिंदल, जंगल और जनाक्रोश: 2008 का पुलिस दमन नहीं भूलेंगे रायगढ़ के लोग
रायगढ़ में 5 जनवरी को काला दिवस मनाया गया। यह आयोजन 2009 से हर साल इसी तारीख को मनाया जाता है ताकि 2008 में…
कारपोरेट लूट- पुलिसिया दमन के विरोध में दुर्ग में दस्तक: किसान-मजदूर-आदिवासियों ने…
कंपनियों की जागारी नहीं, छत्तीसगढ़ हमारा है!
लाठी गोली की सरकार नहीं चलेगी, नहीं चलेगी!! …
धरमजयगढ का संघर्ष आख़िरी दौर में
धरमजयगढ़ में भास्कर समूह की कंपनी डीबी पावर लिमिटेड के प्रस्तावित कोयला खनन के ख़िलाफ़ अगली 15 दिसंबर को रैली की शक़्ल में बड़ी जन कार्रवाई होगी। यह रैली 40 गांवों से होकर गुज़रेगी- कंपनी विरोधी लहर को ताज़ा और तेज़ करने का काम करेगी। कोयला मंत्रालय ने दोटूक फैसला सुना दिया है कि अगले साल 31 अप्रैल तक अगर कोयले के खनन का काम नहीं शुरू हो सका तो…
और पढ़े...
धरमजयगढ का संघर्ष आख़िरी दौर में
धरमजयगढ़ में भास्कर समूह की कंपनी डीबी पावर लिमिटेड के प्रस्तावित कोयला खनन के ख़िलाफ़ अगली 15 दिसंबर को रैली की…
आदिवासी लडेंगे, पीछे नहीं हटेंगे
जंगसाय कोया गोंड आदिवासी हैं और सरगुजा के निवासी हैं। वे दसवीं के छात्र थे जब 2000 में अलग राज्य बना और ज़मीनों…
छत्तीसगढ़ महतारी की नीलामी का राज्योत्सव
महामहिम राष्ट्रपति ने कल शाम छत्तीसगढ़ की नयी राजधानी नया रायपुर में बने राज्य के नये मंत्रालय भवन और विभागाध्यक्ष भवन का लोकार्पण किया और इसी के साथ राज्योत्सव का समापन हो गया। यहां सब कुछ नया था, शानदार और शंहशाही था। हां, इस जादुई मेले के बाहर सब कुछ ज़रूर वही पुराना था- भुखमरी और ग़रीबी का नज़ारा, कल्याणकारी सरकर की ज़्यादतियों और बेदिली के…
और पढ़े...
छत्तीसगढ़ को लूटने का राज्योत्सव
अदम के शेरअदम का मतलब है वंचित। अदम गोंडवी सचमुच पूरी उम्र अभाव और ग़रीबी में जिये- अदम थे, अदम ही रहे। वे कुल…
उद्योगों के लिए खेती पर हमला
छत्तीसगढ़ में खेती संकट में है। नदी और जंगल भी संकट में है। लोगों की हालत बहुत पतली है, लगातार और पतली होती जा रही…
श्रम शक्ति की लूट के बग़ैर कोई मुनाफ़ा मुमकिन नहीं
सस्ते श्रम के दोहन से शुरू होता है लूट, भ्रष्टाचार और विस्थापन और जो अंतत: पूंजी और संसाधनों का केंद्रीयकरण करता है। इस प्रक्रिया को सहज बनाने के लिए ही मजदूर आंदोलन को विभिन्न मुद्दों को लेकर जारी जन संघर्षों से काट देने और उसे मजदूरों के आर्थिक संघर्षों तक सीमित कर देने की राजनीति को हवा दी जाती है। मजदूरों और उनके जुझारू नेतृत्व को इसे समझना…
और पढ़े...