संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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हिमाचल प्रदेश

मखौल बनता वन अधिकार कानून

हिमाचल प्रदेश सरकार वन अधिकार अधिनियम का उल्लंघन कर वनवासियों को जबरन बेदखल कर रही है। ऐसा उच्च न्यायालय के फैसले की आड़ में किया जा रहा है। आवश्यकता इस बात की है कि वन अधिकार कानून का अनुपालन उसकी मूल भावना के अनुरूप ही हो। पेश है सप्रेस से साभार कुलभूषण उपमन्यु की रिपोर्ट; पिछले दिनों में हिमाचल प्रदेश के वन विभाग ने ऊपरी शिमला के रोहडू व अन्य…
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रिकोङ्ग्पिओ में कब्जा हटाओ अभियान के विरुद्ध विशाल विरोध प्रदर्शन

हिमालय नीति अभियान हिमलोक जागृति मंच वन अधिकार संघर्ष समिति किनौर प्रेस विज्ञप्ति रिकोङ्ग्पिओ में कब्जा हटाओ…

पर्यावरण के नाम पर वनाधिकार कानून की अनदेखी !

हिमाचल के किसानों द्वारा किए गए नाजायज कब्जे के मसले पर हिमाचल उच्च न्यायालय का 6 अप्रैल 2015 का आदेश पर्यावरण…

होली-बजोली पॉवर प्रोजेक्ट का विरोध कर रहीं 32 महिला आंदोलनकारी गिरफ्तार

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में होली-बजोली पॉवर प्रोजेक्ट के विरोध में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठी 32 महिलाओं को पुलिस ने 25 मार्च 2014 को महिला पुलिस कर्मियों पर हमला करने एवं कंपनी की मशीनरी की तोड़फोड़ करके कानूनी व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। ये महिलाएं लंबे समय से बजोली-होली पावर प्रोजेक्ट की सुरंग का निर्माण गांवों की…
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जेपी कंपनी के कड़छम-वांगतू प्रोजेक्ट का बांध तोड़ने का आदेश, 5.19 लाख का जुर्माना

किन्नौर एसडीएम कोर्ट का फैसला :जेपी कंपनी के कड़छम-वांगतू प्रोजेक्ट का बांध तोड़ने का आदेश, 5.19 लाख का…

वन अधिकार कानून लागू करने के आधे-अधुरे फैसले

हिमाचल सरकार ने प्रदेश में 7 अप्रैल को आयोजित होने वाली ग्राम सभा में वन अधिकार कानून -2006 के तहत वन अधिकार कमेंटी गठित करने का ऐजेंडा में शामिल करना जल्दवाजी प्रस्तावित किया हैं। इस संर्दभ में निदेशक पंचायती राज ने आदिवासी विकास विभाग से प्राप्त ऐजेंडा का हवाला देते हुए सभी ग्राम सभाओं को 26 मार्च 2013 को पत्र जारी किया और ग्राम सभा में वन…
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मंत्री जी, देश की वनभूमि पर कारपोरेट का जंगलराज कायम हो गया है !

देश आज उस मुहाने पर खड़ा है जहां या तो जंगल बचाने वाले आदिवासी बचेंगे, या जंगलराज लाने वाले कारपोरेट. देश का क़ानून…

हिमाचल प्रदेश: लूट का रण क्षेत्र

हिमाचल प्रदेश में पिछली दोनों पार्टीयों की सरकारों ने बारी-बारी से प्रदेश को लूट का रण क्षेत्र बना डाला है। खेती की भूमि, वनों व सांझा संम्पदा को बिजली परियोजनाओं, सिमेंट उद्योंगों, खनन, व दूसरी औद्यौगिक तथा व्यावसायिक ईकाइयों को औने-पौने दामों में बेच डाला गया है। बांधों व बिजली परियोजनाओं के निर्माण, सीमेंट उद्योग, खनन, वन उत्पादों की व्यवसायिक…
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