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झारखण्ड
पोटका में भूषण स्टील प्लांट के खिलाफ 22 सितंबर से धरना जारी …
भूषण पावर एंड स्टील की ओर से पोटका में प्रस्तावित प्लांट को लेकर 24
सितंबर को जनसुनवाई का आयोजन किया गया था जिसका प्रखंड के लोग शुरू से ही
विरोध कर रहे थे. भूषण स्टील के प्लांट के खिलाफ 22 सितंबर से धरना जारी है. पेश है कुमार चंद्र मार्डी कि रिपोर्ट -
पोटका प्रखंड के लोग पिछले सात वर्षों से इस क्षेत्र में…
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झारखंड के मुख्य न्यायधीश के नाम खुला पत्र
झारखंड की बहुसंख्यक जनता, आदिवासियों और मूलवासियों को न्याय मिले; उनके हितों में बने और उनकी जमीनों की…
नगड़ी के रैयतों को न्याय कौन देगा?
नगड़ी के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन पर ग्लैडसन डुंगडुंग कि एक रिपोर्ट :-झारखण्ड एक विशिष्ट राज्य…
आखिर नगड़ी के दर्द को कौन समझेगा ?
झारखण्ड की राजधानी रांची से सटे कांके थानान्तर्गत एक आदिवासी बहुल गांव है जिसका नाम नगड़ी। इस गांव की 227 एकड़ जमीन राज्य सरकार ने बंदूक के बल पर छीनकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटि, आई.आई.आई.टी एवं आई.आई.एम. बनाने की तैयारी शुरू कर दी थी । सरकार ने सैंकड़ों पुलिस फोर्स को खेत में उतार कर चारदिवारी का काम प्ररंम्भ किया । 9 जनवरी 2012 के बाद ग्रामीणों को…
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क्या न्यायपालिका आदिवासी विरोधी है?
15 जुलाई, 2012 को रिमझिम बारिस के बीच, सरकार के फरमान पर अपनी जमीन बचाने के लिए नगड़ी गांव के रैयत रांची के कांके…
कांके-नगड़ी में भूमि अधिग्रहण के विरोध में स्थानीय आदिवासियों का संघर्ष
कांके-नगड़ी में सरकार जमीन अधिग्रहण कानून 1894 के तहत 1957-58 में राजेंन्द्र कृर्षि विश्वविद्यालय के विस्तार के लिए…
पूर्वी सिंहभूम, झारखण्ड से पोटका आंदोलनः एक इतिहास
भाग- 1झारखण्ड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सत्ता पर बैठते ही विकास के नाम पर यहां के प्राकृतिक संसाधनों का भरपूर दोहन करने की पूरी योजना बना ली थी। उन्होंने इसकी शुरूआत 2001 में औद्योगिक नीति से की जिसके तहत हजारीबाग जिले के बरही से पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा तक मुख्य सड़क के दोनों ओर 5-5 किलो मीटर तक विशेष अर्थिक…
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भूमि अर्जन के प्रस्तावित विधेयक के खिलाफ लामबंदी
प्रस्तावित भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन विधेयक 2011 के खिलाफ 11 जन संगठनों ने 17 नवंबर 2011 को रांची…
सर्वे टीम को वापस किया आदिवासी महिलाओं की एकजुटता ने
पश्चिम सिंहभूम (झारखण्ड) जिले के नोआमण्डी ग्राम पंचायत क्षेत्र के गांव से सरकारी सर्वे टीम को गांव की आदिवासी…
झारखंड के सारंडा जंगल में आदिवासियों पर पुलिसिया जुल्म: एक सच्ची तस्वीर
10 अक्टूबर, 2011 को झारखंड मानव अधिकार आन्दोलन द्वारा तैयार सारंडा का शाब्दिक अर्थ सात सौ छोटी पहाड़ियों वाला जंगल है। यह एशिया में सबसे बड़ा साल के जंगल के रूप में प्रसिद्ध है। यह झारखंड के जिले पश्चिम सिंहभूम में स्थित है। लगभग 20,000 आदिवासी परिवारों वाली सवा लाख आदिवासी जनसंख्या जंगल में रहती है।
आदिवासी कृषि, जंगली उत्पादों एवं पशुपालन…
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