संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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विस्थापन विरोधी आंदोलन

बांध बनाया, गांव डुबोया : पानी कंपनियों के हिस्से और 35000 विस्थापित आज भी बेघर

मध्य प्रदेश के सरदार सरोवर बांध से करीबन 35000 प्रभावित परिवार आज भी डूब क्षेत्र में बसे हुए है| इनके अलावा पुनर्वास स्थल पर मकान बना चुके कुछ हज़ार परिवार भी वहाँ पानी, निकास,रास्तों तक की,चरनोई की,समतलीकरण की सुविधा न होने पर मूल गाँव से स्थलान्तर नहीं कर सके है,न हि कर सकते है|इनमें से 15946 परिवारों का भविष्य उन्हेआधे अधूरे लाभ देकर उनके मकान…
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बिहार : विस्थापन और पुनर्वास के बीच झूलती जिंदगियां

चाकन्द के चमंडीह गांव में विस्थापन और पुनर्वास के बीच झूलती जिंदगियों ने सामूहिक आत्महत्या को विकल्प बनाया. बिहार…

छत्तीसगढ़ के वन कर्मियों का कारनामा : 46 बैगा आदिवासी परिवारों को किया बेघर

कवर्धा (छत्तीसगढ़)- मुख्यमंत्री के गृहजिला कवर्धा में वन अमले, राजस्व, पुलिस ने बैगा आदिवासियों के आशियाने को उझाड…

उचित मुआवज़ा व पुनर्वास न मिलने पर नर्मदा बांध विस्थापितों ने किया भू अर्जन पुनर्वास कार्यालय का घेराव

मध्य प्रदेश, बड़वानी 2 जुलाई 2018। सरदार सरोवर परियोजना से बड़वानी ज़िले के 65 से अधिक गाँव डूब में है। आज भी इन गाँवों का संपूर्ण पुनर्वास कानूनी तरीके से नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के द्वारा नहीं किया गया है। नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले आज भू अर्जन पुनर्वास कार्यालय बडवानी का घेराव किया। बडवानी जिले के अधिकारियो से चर्चा की गई है, चर्चा में इन…
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उत्तर प्रदेश : वाराणसी के नागेपुर गाँव के ग्रामीणों का कोका कोला के खिलाफ प्रदर्शन

भूजल दिवस के अवसर पर 10 जून 2018 को प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम नागेपुर में ग्रामीणों ने कोका कोला प्लांट मेहदीगंज…

नर्मदा किसानी बचाओ जंग का हुआ आगाज : 4 जून को भोपाल में ‘जन अदालत’

29 जून, 2018| बड़वानी, मध्य प्रदेश : आज नर्मदा किनारे से बड़वानी के झंडा चौक से निकली हैं दसोंगाड़ियाँ। किसान, मजदूर,…

जखोल-साकरी जलविद्युत परियोजना पर जनसुनवाई की नौंटकी; एक बार फिर लुटेंगे प्राकृतिक संसाधन झूठे सरकारी जाल में

उत्तराखंड में यमुना घाटी में सुपिन नदी पर प्रस्तावित जखोल-साकरी जलविद्युत परियोजना, 44 मेगावाट, की जनसुनवाई 12 जून, 2018 को घोषित हुई है। इसमें वही कमियां, वही कानूनी उल्लंघन और नैतिक उल्लंघन की जा रहे हैं जो कि अगस्त 2017 में बहु प्रचारित पंचेश्वर बांध की जनसुनवाई में किये गए। यहां भी लोगों को जनसुनवाई क्यों हो रही है किन कागजो के आधार पर होती है…
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मांगों के बदले दमन बन चुकी है भाजपा सरकार की नई जन नीतिः बेगा जनजाति के शांतिपूर्ण…

उधर नरेंद्र मोदी ने बनारस में बयान दिया कि अब आंदोलनों तथा प्रदर्शन से मांगे मनवाने का समय खत्म हो चुका है और…

सुपेबेड़ा गाँव के आदिवासी गंदा पानी पीने को मजबूर 58 की मौत : छत्तीसगढ़ सरकार, मुख्य सचिव, सचिव पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय को राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने दिया नोटिस

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा गाँव से एक किमी की दूरी पर हीरा खदान है। सरकार ने 2005 से पूरे इलाके को संरक्षण में ले रेखा। पिछले साल 58 आदिवासियों की मौत गंदा पानी पीने को हो चुकी है, आज सुपेबेड़ा में करीब 235 लोग किडनी, लीवर की बीमारी से ग्रसित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनका गांव हीरा खदान क्षेत्र में होने की वजह से सरकार उन्हें यहां से…
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