संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad

2 सितंबर को मजदूरों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल : समाजवादी समागम का समर्थन

समाजवादी समागम के राष्‍टृीय संयोजक पूर्व विधायक डॉ सुनीलम प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मजदूरों के केंद्रीय संगठनों द्वारा 2 सितंबर को राष्‍टृव्‍यापी हड़ताल के आवाहन का समर्थन करते हुए देश के समाजवादियों से बढ़-चढ़ कर आम हड़ताल को सफल बनाने की अपील की है।

डॉ सुनीलम ने कहा कि देशभर के सहमना संगठनों, विशेषकर भूमि अधिकार आंदोलन] एनएपीएम] जय किसान आंदोलन के साथ मिलकर भूअधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया। देशभर के किसान संगठनों, जनसंगठनों एवं प्रगतिशील पार्टियों के द्वारा चलाये गये जनआंदोलन के परिणामस्वरूप सरकार को पीछे हटना पड़ा। देश के किसानों को जनसंघर्ष की जीत की बधाई। अखबारों के अनुसार अब 2013 का कानून लागू होगा जिसमें कुछ प्रावधान तो हमारे पक्ष में हैं लेकिन कृषि योग्य भूमि का अधिग्रहण ग्रामसभा की सहमति के बिना किये जाने पर कोई रोक नहीं है तथा पूरे मुद्दे को राज्यों पर छोड़ दिया गया है। इसका मतलब यह है कि किसानों को भूअधिग्रहण के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखना होगा। किसानों पर हमला करने के पहले सरकार ने मजदूरों पर हमला किया। तमाम उन श्रम कानूनों के बदल दिया जो पिछले 100-150 साल के संघर्ष के बाद मजदूरों ने हासिल किया था। पूरे देश का मजदूर तबका कहीं से इन बदलावों के खिलाफ संघर्षरत है।

डॉ सुनीलम ने 2 सितंबर को देश की सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मोदी सरकार द्वारा श्रम कानूनों में किए जा रहे घोर मजदूर विरोधी बदलावों के खिलाफ पूरे देश के स्तर पर आम हड़ताल के आह्वान का समर्थप करते हुए कहा कि लोकसभा चुनावों में पूंजीपतियों द्वारा लुटाए गए हजारों करोड़ रुपयों की बदौलत सत्‍ता में आए नरेंद्र मोदी ने गद्दी पर बैठते ही पूंजीपतियों के इशारों पर मजदूर वर्ग पर बहुत जबर्दस्त हमला बोला है। मोदी सरकार द्वारा 44 केंद्रीय श्रम कानूनों को कांट-छांट कर केवल 4 नियमावलियों में सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है।

श्रम कानूनों में इन प्रस्तावित संशोधनों के द्वारा जहां पूंजीपतियों को पूरी तरह अपनी मनमानी चलाने की छूट मिल जाएगी वहीं मजदूरों के लिए हक और न्याय के सभी दरवाजे बंद हो जाएंगे। प्रस्तावित संशोधनों में पूंजीपतियों को 300 से कम स्थाई मजदूरों वाली कंपनियों में छंटनी, तालाबंदी, शिफ्टिंग, ले ऑफ व मिलबंदी की छूट, महिला मजदूरों से रात की पाली में काम कराने की छूट, कारखानों के भीतर इंस्पेक्टर के छापों से छूट, 50 से कम मजदूरों वाली कंपनियों में रजिस्टर रखने व हिसाब किताब देने (रिटर्न भरने) की छूट, अपनी मर्जी से मजदूरों की साप्ताहिक छुट्टी तय करने की छूट सहित कई अन्य मामलों में छूट देने की बात कही गई है ताकि पूंजीपतियों मजदूरों को बेधड़क, बेरोकटोक किसी हद तक शोषण कर सकें।

इसी के साथ मजदूरों के यूनियन बनाने, हड़ताल करने जैसे अधिकारों को बेहद मुश्किल व जटिल बनाने की कोशिश की गई है। ट्रेड यूनियन बनाने के लिए आवेदकों की न्यूनतम संख्या जो पहले 7 थी, को बदलकर 10 प्रतिशत या 100 प्रतिशत करने की बात की जा रही है। इसी के साथ यूनियनों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक व ट्रेड यूनियनों को राजनीति से दूर रखने की बात की जा रही है। इसका उद्देश्य समझौता वार्ताओं के दौरान मजदूरों की मोलतोल की क्षमता को कमजोर करना तथा उनके भीतर वर्गीय व क्रांतिकारी चेतना के विकास को रोकना है। इसी तरह हड़ताल करने के लिए पूर्व सूचना की अवधि जो वर्तमान में 2 सप्ताह या 14 दिन है को बढ़ाकर 6 सप्ताह करने की बात की गई है और ऐसा न करने पर हड़ताल अवैध मानी जाएगी।

अवैध हड़ताल करने पर हड़ताल के आयोजकों, हड़ताल में भाग लेने वालों व हड़ताल को समर्थन देने वालों पर 20 से 50 हजार रुपए जुर्माना या 1 माह की कैद या दोनों एक साथ की सजा दी जा सकती है।

श्रम कानूनों में प्रस्तावित संशोधनों का विरोध करना व इनको लागू होने से रोकने के लिए मजदूर वर्ग तथा के अन्य वंचित तबकों की व्यापक एकता आज की जरूरत है। मजदूर वर्ग को अपने बीच से स्थाई, कैजुअल, ठेका, जाति, धर्म सहित सभी बनावटी बंटवारों को दरकिनार कर पूंजीपति वर्ग के निरंकुश हमले का मुकाबला करना होगा। स्थाई मजदूरों की स्थिति बुरी होने पर बाकी मजदूरों की स्थिति और बुरी हो जाएगी। अतः साथियों पूंजीपति वर्ग का यह हमला समस्त मजदूर वर्ग पर है। मजदूर वर्ग को इस हमले का करारा जवाब देना होगा। पूंजी, कंपनी, कारपोरेट के खिलाफ अपने संघर्ष को तेज व जुझारू बनाना होगा।

समाजवादी समागम के सभी समाजवादियों से अपील की है कि वे कल होने वाली हड़ताल में बढ़-चढ़ कर हिस्सेदारी करें।
भवदीय
डॉ सुनीलम
09425109770

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