संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad

झारखण्ड सरकार द्वारा घोषित स्थानीयता निति के विरोध में संताल आदिवासियों की प्रतिरोध सभा


-सच्चिदानंद सोरेन

1 मई 2016, झारखण्ड के दुमका(स.प.)राजबांध पंचायत के राजबांध गांव में ग्रामीणों ने झारखण्ड सरकार के द्वारा घोषित स्थानीयता निति को लेकर संताल आदिवासियों का स्वशासन व्यवस्था मोड़े मंझी का बैठक किया गया और इसपर विस्तृत चर्चा किया गया.जिसमे राजबांध पंचायत के ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों ने भाग लिया.चर्चा के बाद गांव के प्रधानों और ग्रामीणों ने यह पाया गया कि रघुवर सरकार की स्थानीयता निति झारखण्ड के आदिवासी और मुलवासियो के विरोध में है.यह निति सिदो-कान्हू,चाँद,भैयरो,फूलो,झानों स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों के विरोध में है जिन्होंने अपने जान देकर देश के लिय अंगेजो के विरोध हुल(लड़ाई) किया था. यह स्थानीयता निति आजाद भारत में बिटिश शासन को याद दिलाती है.

रघुवर सरकार ने झारखण्ड के स्थानीय निवासी को जो परिभाषित किया है वह तर्क संगत और न्याय संगत नहीं है.यह झारखण्ड के मूलवासी(गैर आदिवासी और आदिवासी)को ध्यान में रख कर नहीं बनाया गया है.इसके केंद्र बिंदु में सिर्फ और सिर्फ बाहरी लोगों को किस तरह यहाँ का स्थानीय निवासी बनाया जाय को ध्यान में रख कर बनाया गया है. मोड़े मंझी मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास और दुमका के विधायक सह मंत्री डॉ लुइस मरांडी से यह सवाल पूछा कि जब झारखण्ड के मूल आदिवासी अग्रेज जमाने में आसाम गए,आज तक उन्हें वहाँ आदिवासी का दर्जा नहीं दिया गया तो कैसे झारखण्ड में 30 वर्ष और मेट्रिक पास(जन्मे) करने पर बाहरी लोगों को स्थानीयता घोषित किया जा रहा है ?

इस मूलवासी विरोधी निति के विरुद्ध में झारखण्ड के मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास और दुमका के विधायक सह कल्याण मंत्री डॉ लुइस मरांडी का पुतला फुका गया और मोड़े मंझी ने मांग किया कि स्थानीय निति में संशोधन किया जाय और 1932 खतियान को ही आधार मानकर झारखण्ड के स्थानीय निवासी को परिभाषित किया जाय और जब तब यह संशोधन नहीं हो जाता तब तक सभी सरकारी नियुक्ति स्थगित किया जाय.अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो ग्रामीण सड़क पर उतरकर आन्दोलन के लिय विवश होगे.मोड़े मंझी में ग्रामीणों और प्रधानों ने सर्व सम्मति से यह निर्णय लिया कि जो राजनितिक दल या नेता 1932 खतियान को झारखण्ड का स्थानीयता का आधार का समर्थन नहीं करेगे और ग्रामीण स्तर तक आन्दोलन नहीं करेगा उस नेता और उस पार्टी का सामाजिक और राजनितिक बहिष्कार किया जाएगा .इसके साथ मोड़े मंझी में यह भी निर्णय लिया गया कि सरकार के इस काला स्थनीयता निति के मूलवासी को होने वाली हानि से सभी गांव के ग्रामीणों को बताया जायेगा और उन्हें जागरूक किया जायेगा.

सर्व सम्मति से इसके लिय एक संगठन का गठन किया गया जिसका नाम आदिवासी-मूलवासी एकता संगठन रखा गया.इस मौके पर जिला परिषद योगेश मुर्मू,जयश्री टुडू,अनिल मरांडी,शिव चन्द्र मरांडी,शिव कुमार हांसदा,मटकुस हेम्ब्रोम,मंगल मुर्मू,बाबुराम मुर्मू,सलीम मरांडी,सुलेमान मरांडी,लोगोनी बेसरा,प्रियंका मरांडी,एलिजाबेथ हेम्ब्रोम,सोनामुनी मुर्मू,सूरज मरांडी,बड़की टुडू,मुरुकुस हेम्ब्रोम,शिवचंद मरांडी,शिव कुमार हांसदा के साथ काफी संख्या में महिला और पुरुष उपस्थि थे.

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