संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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उत्तर प्रदेश

2 सितम्बर मजदूर हड़ताल : भूमि अधिकार आंदोलन का समर्थन का ऐलान; गांधी प्रतिमा, लखनऊ में जनप्रदर्शन

भूमि अधिकार आंदोलन देश में मोदी सरकार के भूमि विरोधी नीतियों के खिलाफ एक जनमोर्चा है ने 2 सितम्बर 2016 को इस देश व्यापी मजदूर हड़ताल में पूरे देश में और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तथा कई जिलों जैसे बलिया, सोनभद्र, सहारनपुर, पलिया लखीमपुर खीरी, मानिकपुर बांदा आदि में शामिल होने का फैसला लिया है। भूमि अधिकार आंदोलन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ व भूमि…
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ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के खिलाफ धरने को 6 माह : किसान नहीं जमीन देने को…

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ 25 फ़रवरी…

भूमि की लूट और राज्य दमन के खिलाफ उत्तर प्रदेश के जनसंघर्ष भूमि अधिकार आंदोलन के…

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 12 अगस्त 2016 को गांधी भवन में भूमि अधिकार आंदोलन के बैनर तले एक राज्य स्तरीय…

भूमि अधिकार आंदोलन, उत्तर प्रदेश की बैठक : 12 अगस्त 2016 गाँधी भवन, लखनऊ

साथियों जैसा की आपको मालूम है की गत 16 से 18 जुलाई 2016 को गुजरात के अहमदाबाद शहर में भूमि अधिकार आंदोलन की मोदी अडानी मॉडल की सच्चाई उजागर करने के लिए एक सम्मलेन हुआ था. यह सममेलन बेहद ही सफल रहा और इसी दौरान गुजरात के दलित समुदाय ने भी मोदी सरकार के विकास के मोडल की धज्जिया उड़ा दी है व् पुरे देश में दलित समाज को मनुवादी एवम हिंदुत्वादी…
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करछना के किसानों पर कहर जारी : 9 सितम्बर के दमन के बाद गांवों में मेधा पाटेकर का…

पिछले वर्ष 2015 की 9 सितम्बर को उत्तर प्रदेश सरकार ने करछना में किसानों की जमीन हड़पने के लिए क्रूर पुलिसिया…

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को 9 माह से मुख्य सचिव की रिपोर्ट का इंतजार : करछना के किसानों पर पुलिसिया दमन

गत वर्ष सितबंर महीने की 9 तारीख को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में करछना तहसील के कचरी गांव में ‘किसान कल्याण संघर्ष समिति’ करछना के बैनर तले जेपी पॉवर प्लांट के भूमि अधिग्रहण के विरोध में धरना दे रहे किसानों का पुलिस द्वारा क्रूर दमन किया गया था। 9 सितम्बर 2015 की सुबह 7 बजे किसान आंदोलनकारियों पर पुलिस कहर बनकर टूट पड़ी थी। नाबालिग से…
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अफवाहों से बुंदेलखंड में नाकामी छुपाने की कोशिश

स्वतंत्र पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव ने सूखा, पलायन, भूखमरी और किसानों की आत्महत्या से पस्त बुंदेलखंड से लोट कर…

सूखा, अकाल और सरकारी उपेक्षा से मरते बुंदेलखंड के लोग : भाग एक

कॉपी में लिखी गई बातें स्वतंत्र पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव ने सूखा, पलायन, भूखमरी और किसानों की आत्महत्या से पस्त बुंदेलखंड से लोट कर यह लम्बी रिपोर्ट लिखी है जिसे हम चार किस्तों में आपसे साझा करेगे. पेश है बुंदेलखंड की जमीनी हालत पर लिखी रिपोर्ट का पहला भाग; जियो तो ऐसे जियो कि जिंदगी निखर उठे, मरो तो ऐसे मरो कि मौत चमक उठे''. ये…
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