संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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राज्यवार रिपोर्टें

आदिवासी क्षेत्र में कम्पनी के लिए भू- हस्तांतरण और संवैधानिक प्रावधान

भारत सरकार कानून 1935 की धारा 92 में प्रावधान था कि केन्द्र और राज्य कोई भी कानून पूर्णतः और आंशिक अपवर्जित(छोङा हुआ) क्षेत्रों में लागू नहीं होंगे। ये क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य थे और भारतीय संविधान में इन्हे पांचवी और छठवीं अनुसूची में वर्गीकृत किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 244 में पांचवी अनुसूचि वाले क्षेत्र में यह व्यवस्था है कि किसी भी कानून…
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तमिलनाडु : स्टरलाइट विरोधी प्रदर्शन के दौरान हुई हत्याओं की जांच के तीन साल बाद भी…

पुलिस कार्रवाई जिसने 22 मई, 2018 को 12 लोगों की जान ले ली थी और पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था, गोलीबारी की यह…

उड़ीसा : पुरी में हवाई अड्डा बनाने लिए पांच लाख से ज्यादा पेड़ काटे जाएंगे

-श्रीकांत मोहंती उड़ीसा सरकार ने पुरी जिले के समुद्र तट से लगते सिपसरुबुली क्षेत्र में एक नया अंतरराष्ट्रीय हवाई…

मध्य प्रदेश : बकस्वाहा जंगल बचाने की मुहिम को मिली शुरुआती सफलता, एनजीटी ने स्वीकार की याचिका

बकस्वाहा जंगल बचाने की मुहिम को मिली शुरुआती सफलता, एनजीटी ने स्वीकार की रिट प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर संगठनों का मोर्चा बनाने की तैयारी भी शुरू भोपाल, 18 जून 2021। बकस्वाहा जंगल बचाने के मामले में दायर याचिका पर 17 जून को एनजीटी में पेशी हुई। उज्जवल-पुष्पराग विरुद्ध मध्य प्रदेश सरकार के मामले में हीरा खनन कंपनी को 30 जून तक अपना जवाब मय…
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मध्यप्रदेश : बकस्वाहा जंगल के 2.15 लाख पेड़ों की बलि लेगी हीरों की चाहत

मप्र के बुंदेलखंड क्षेत्र में एक छोटा सा कस्बा है बकस्वाहा, जहां देश का सबसे बड़ा हीरा भंडार पाया गया है. बकस्वाहा…

उड़ीसा : देव माली पहाड़ के लोग क़रीब दो दशकों से कंपनियों और व्यवस्था के खिलाफ क्यों…

उड़ीसा के कोरापूट जिले के सिमलीगुड़ा तहसील में स्थित है विशाल देव माली पर्वत। देव माली पर्वत के स्थानीय आदिवासी…

मध्य प्रदेश : बक्स्वाहा के जंगल में 2.15 लाख पेड़ काट निकाले जायेंगे हीरे; पर्यावरण बचाने एकजूट हुए लोग

मध्य प्रदेश के छतरपुर में बक्सवाह हीरा खदान के लिए काटे जाने वाले 2.15 पेड़ों को बचाने के लिए मध्य प्रदेश सहित देशभर के एक लाख 12 हजार लोग सामने आ गए हैं। कोरोना के मद्देनज़र इन सभी ने फिलहाल सोशल मीडिया पर ‘सेव बक्सवाहा फॉरेस्ट’ कैंपन चलाया है, किन्तु जैसे ही कोरोना संक्रमण थमेगा ये सभी बक्सवाहा पहुंच जाएंगे। आवश्यकता पड़ी तो पेड़ों से चिपकेंगे। गत 9…
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पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा के संवैधानिक…

सैन्य कैम्प का विरोध कर रहे ग्रामीणों पर फायरिंग की उच्च न्यायालय के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमिटी गठित कर…

छत्तीसगढ़ : बस्तर में पुलिस कैंप का विरोध कर रहे आदिवासियों पर फायरिंग की न्यायायिक…

बस्तर में पुलिस गोलीचालन की उच्च न्यायालय के न्यायधीश से जांच कराए सरकार दोषी अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज…

पं. बंगाल : गंगा नदी की हर साल बढ़ती कटान से उजड़ते लोग

पश्चिम बंगाल में गंगा नदी के किनारे स्थित गांव कई वर्षों से नदी के द्वारा कटाई की परेशानी का सामना कर रहे हैं। इस कटाई में नदी गांव की सीमा में प्रवेश कर जाती है अपने साथ घर और खेतों को बहा ले जाती है। कई स्थानीय विशेषज्ञ नदी की बढ़ती कटाई के लिए फरक्का बैराज के निर्माण को जिम्मेदार मानते हैं। उनका मानना है कि नदी की राह में यह बैराज बाधा बन…
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