संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad
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वनाधिकार

मध्य प्रदेश सरकार बना रही 11 नए अभयारण्य : हजारों आदिवासियों पर विस्थापन का खतरा

मध्यप्रदेश का वन विभाग 11 नए अभयारण्य और रातापानी को टाईगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा है। राज्य के 9 बङे उद्यान और 25 अभयारण्य हैं जो कि 11893 वर्ग किलोमीटर अर्थात 11 लाख 89 हजार 300 हेक्टेयर में फैला हुआ है। 11 नए अभयारण्य से 2163 वर्ग किलोमीटर अर्थात 2 लाख 16 हजार 300 हेक्टेयर संरक्षित क्षेत्र को शामिल कर लिया जाएगा। प्रदेश में…
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मध्य प्रदेश : अवैध बेदखली और लूट के विरोध में आदिवासियों का प्रदर्शन

3000 से ज्यादा आदिवासियों ने धरना कर किया खंडवा प्रशासन द्वारा अवैध बेदखली और लूट का विरोध; कानून का उल्लंघन कर

पच्चीसवें साल में पेसा : ग्राम सभा को सशक्त करने के लिए आया कानून खुद कितना मजबूत!

-कुंदन पाण्डेय पेसा यानी पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) क़ानून 1996 में आया था। इस कानून को…

संसद द्वारा एकमत से पारित वनाधिकार कानून के बाद भी आदिवासियों, वनाश्रितों के साथ अन्याय क्यों?

2006 में देश की संसद द्वारा ऐतिहासिक अन्याय खत्म करने को एकमत से 'वनाधिकार' कानून बनाया गया था। कानून से आस जगी थी कि देश में पीढ़ियों से वनभूमि पर अपने अधिकारों से वंचित करोडों दलित, आदिवासी व घुमंतु परिवारों को न्याय मिलेगा। अन्याय खत्म होगा। करोड़ों लोगों की ज़िंदगी में आजादी का सूरज उग सकेगा। अंधियारा मिटेगा और एक सबसे बड़े भूमि-सुधार के आंदोलन को…
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14 साल बाद : वनाधिकार कानून के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत

वन अधिकार कानून 2006 के प्रस्तावना में उल्लेख है कि औपनिवेशिक काल के दौरान तथा स्वतंत्र भारत में राज्य वनों को…

सिमिलीपाल टाइगर रिजर्व : बाघों के संरक्षण के लिए आदिवासियों की बलि

सिमिलीपाल टाइगर रिजर्व से विस्थापित किए गए आदिवासियों के बीच बढ़ते असंतोष से अब बाघ संरक्षण और आदिवासियों के निवास के अधिकार के बीच संघर्ष पैदा हो रहा है। इस साल जनवरी 2020 में सिमिलीपाल टाइगर रिजर्व के अंदर खेजुरी गाँव के 60 परिवारों के 110 लोगों को जबरन स्थानांतरित किया गया। जो लोग अभी भी टाइगर रिजर्व में बसे हुए हैं उनका आरोप है कि वन विभाग के…
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मध्य प्रदेश : लॉकडाउन में वन कर्मियों ने आदिवासियों के घर जलाए

भोपाल 2 जून 2020। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के सिवाल गांव के आदिवासी निवासियों कहना है कि वन अधिकारियों ने…

मोदी सरकार कॉरपोरेटस हित में पर्यावरण प्रभाव निर्धारण प्रकिया में बदलाव कर रही

सरकार तथा कम्पनियों की क्रूर चाल के विरोध में न्यायपूर्ण एवं लोकतांत्रिक संघर्ष को गोलबंद करने की जरुरत है। यह…

मध्य प्रदेश के आदिवासियों का ऐलान : जंगल उनकी पुरखों की पहचान, नहीं देंगे नागरिकता और जंगल पर हक का सबूत

मध्य प्रदेश के बैतूल और हरदा जिले में  3-4 फरवरी 2020 को आदिवासियों की संविधान संशोधन कानून पर हुई एक चर्चा के दौरान आदिवासियों ने स्पष्ट कह दिया है कि वह अपनी नागरिकता किसी के सामने साबित नहीं करने जा रहे हैं।  बल्कि वह एक अभियान के तहत  अपने अलग-अलग तीर्थ-स्थल और राजाओ के किले पर जाकर अपने पुरखो को याद करेंगे और सरकार से आव्हान करेंगे कि वो यहाँ…
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