संघर्ष संवाद
Sangharsh Samvad

निर्यात हेतु ‘जीएम’ बासमती नहीं, देशवासियों के लिए ‘जीएम’ सरसों क्यों?

खेती में अनेक सरकारी हस्तक्षेपों की तरह ‘जीन-संवर्धित’ बीजों को लाने के पीछे भी उत्पादन बढ़ाने का बहाना किया जा रहा है, लेकिन क्या बिना जांच-पड़ताल के किसी अज्ञात कुल-शील बीज को खेतों में पहुंचाना ठीक होगा? सरसों और धान में हाल में यही किया जा रहा है। प्रस्तुत है, ‘जीएम’ बीजों को लाने की जिद को उजागर करता राजेंद्र चौधरी का यह लेख; अक्तूबर 2022…
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बांध तो नहीं रुका, लेकिन क्या आंदोलन भी असफल रहा?

करीब चार दशकों के लंबे अनुभव में ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ को अपनी सफलता-असफलता के सवालों का सामना करते रहना पड़ा है। एक…

पेसा कानून : 26 वर्षों से क्रियान्वयन का इंतजार करता आदिवासी स्व-शासन का कानून

-डॉ सुनीलम 24 दिसंबर 2022 को पेसा कानून लागू हुए 26 वर्ष पूरे हो जाएंगे। भारत की संसद में 15 दिसंबर 1996 को पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (पेसा) पारित किया गया। भारत के राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद इसे 24 दिसंबर 1996 को लागू कर दिया गया। पांचवी अनुसूची के 10 राज्यों हिमाचल प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश,…
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उत्तर प्रदेश : हवाई पट्टी विस्तारिकरण के नाम पर जमीन छिनने के खिलाफ उतरा संयुक्त…

आजमगढ़। संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वाधान में विविध संगठनों (किसान संग्राम समिति, रिहाई मंच,अखिल भारतीय किसान महा…

लखीमपुर खीरी हत्याकांड का एक साल : आज भी पीड़ितों को इंसाफ़ का इंतज़ार

एसकेएम ने मृतक 4 किसान और एक पत्रकार की याद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया है। इसी तरह देशभर में किसान जगह-जगह मारे गए किसानों को शहीद के तौर पर याद करते हुए केंद्र सरकार का पुतला फूंककर अपना आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं।
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भूमि अधिकार आंदोलन का राष्ट्रव्यापी आह्वान : 10 दिसम्बर और 30 जनवरी 2023 को…

भूमि अधिकार आन्दोलन का चौथा राष्ट्रीय सम्‍मेलन 26-27 सितम्बर 2022 को नई दिल्ली में कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित…

मध्य प्रदेश : ढाई दशक बाद महेश्वर परियोजना प्रभावितों और विस्थापितों के संघर्ष की…

महेश्वर विद्युत् परियोजना के सभी समझौतों को रद्द करने का मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदन नर्मदा बचाओ आंदोलन के तहत…